गोरखपुर। दखल देकर शहर की जिन दो योजनाओं को खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुलझाया था वह जीडीए अफसरों की कारस्तानी की वजह से फिर उलझ गई हैं। एक दशक से अधिक समय से लटके मानबेला की अधिग्रहित जमीन के मामले में जहां किसान फिर कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं वहीं नौसड़ से कालेसर तक स्ट्रीट लाइट को लेकर एक ठेकेदार ने मोर्चा खोल दिया है।
मानबेला किसान संघर्ष समिति ने जीडीए पर समझौते की अनदेखी कर नई शर्तें थोपने का आरोप लगाया है। बरकत अली, हरिद्वार पांडेय, मोहम्मद हदीस, शमीम अहमद, आफताब अहमद समेत कई किसान नेताओं का कहना है कि समझौते में कहीं भी अधिग्रहण के तौर पर पूर्व में प्राधिकरण द्वारा दी गई रकम पर ब्याज लगाने को लेकर कोई सहमति नहीं बनी थी। अब प्राधिकरण उस रकम पर ब्याज जोड़कर बढ़े हुए मुआवजे की रकम में से उसे काटना चाहता है, जबकि उस जमीन का किसानों ने इस्तेमाल ही नहीं किया।
उन्होंने प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पर आरोप लगाया है कि इन सभी मुद्दों को लेकर जब उन्होंने गत दिवस उनसे मुलाकात की तो उपाध्यक्ष ने उनसे अभद्रता की। उधर, काम शुरू हो जाने के बाद नौसड़-कालेसर स्ट्रीट लाइट का टेंडर निरस्त कर देने का प्रताप इंटरप्राइजेज ने विरोध शुरू कर दिया है। फर्म का कहना है कि उसने सभी गड्ढे खोदवा दिए थे और पोल, लाइट आदि की खरीदारी भी कर ली। इसकी भरपाई कौन करेगा। इसे लेकर फर्म ने कोर्ट जाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।