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शोरगुल में दब गई मन की बात

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राजन राय
गोरखपुर। इंसेफेलाइटिस से काल के गाल में समाए मासूम के घरवालों के जख्मों पर मरहम लगाने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री से कुछ कहने की कसक एक पिता और दादी के मन में रह गई। सपाइयों के शोरगुल से उनके ‘मन की बात’ सामने नहीं आ सकी। पीड़ित के घर छह मिनट तक रुके अखिलेश ने भी कार्यकर्ताओं के उत्साह और सेल्फी की होड़ से असहज महसूस किया। यही वजह थी कि दो-तीन सवाल पूछने के बाद ही गाड़ी में बैठकर वह चले गए।
खोराबार के बेलवार के श्रीकिशुन गुप्ता के चार दिन के मासूम की मौत नौ अगस्त को मेडिकल कॉलेज में हो गई थी। श्रीकिशुन को सोमवार सुबह पूर्व मुख्यमंत्री के आने की सूचना कुछ सपा नेताओं ने घर जाकर दी। तयशुदा कार्यक्रम के तहत पूर्व मुख्यमंत्री उनके घर पहुंचे। संकरी सड़क पर गाड़ियों का रेला और कार्यकर्ताओं की भीड़ से खड़े होने की जगह भी नहीं बची। अखिलेश जैसे ही गाड़ी से उतरे और पीड़ित के घर की ओर बढ़े, कार्यकर्ताओं के हुजूम से घिर गए। कुछ देर नारेबाजी हुई तो बडे़ नेताओं ने शांत कराया। शोरगुल के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ने श्रीकिशुन से पूछा, बच्चे का नाम रखा था। श्रीकिशुन ने सिर हिलाकर संकेत दिया, नहीं। इसके बाद अगला सवाल था कि क्या करते हो। मेडिकल कॉलेज में दवाएं मिली थीं, ऑक्सीजन बच्चे को दी गई कि नहीं। लेकिन यह आवाज शायद श्रीकिशुन के कानों तक नहीं पहुंची और वह सिर्फ मौन खड़े रहे। इसी बीच बच्चे की दादी इशरावती भी पहुंच गईं। उन्होंने अखिलेश के पैर छूने की कोशिश की तो उन्होेंने बांह थाम कर उठा लिया। बोले, परेशान न हों, हम मदद करेंगे। इशरावती भी कुछ कहने के लिए बोलीं लेकिन आवाज शोर के बीच दब गई। इसी बीच बेकाबू कार्यकर्ताओं को देख अखिलेश गाड़ी की ओर बढ़ गए।
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फिसल गए अखिलेश
पिपरौली। बेलीपार इलाके के बाघागाड़ा गांव में अखिलेश यादव पीड़ित ब्रह्मदेव यादव के घर जाने के लिए आगे बढ़े तो कीचड़ में फिसल गए। उनके साथ मौजूद सुरक्षाकर्मी ने तत्काल उन्हें पकड़ लिया। इसके बाद उन्होंने ब्रह्मदेव को गाड़ी में बैठा लिया और गांव में ही इंसेफेलाइटिस से मृत मासूम के पिता संजय गोंड से मिलने उनके घर पहुंच गए।
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ऑक्सीजन नहीं मिली, खून भी खरीदा
पिपरौली। बाघागाड़ा के ब्रह्मदेव यादव ने बताया कि उनकी पत्नी सुमन ने एक अगस्त को सदर अस्पताल में दो बच्चों (एक लड़का-एक लड़की) को जन्म दिया। जन्म के कुछ देर बाद ही दोनों को हल्का बुखार आने लगा। प्राइवेट डॉक्टर से इलाज शुरू कराया। तीन अगस्त को जब हालत नहीं सुधारा तो मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। ब्रह्मदेव ने बताया कि रोजाना ब्लड की जांच हुई। खून की जरूरत हुई तो मेडिकल कॉलेज में नहीं मिला। गोरक्षनाथ चिकित्सालय से एक यूनिट ब्लड खरीद कर लाया। नौ अगस्त की रात 7.30 बजे बेटा और 10 अगस्त की सुबह लड़की ने दम तोड़ दिया।
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