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ये आपकी हनक नहीं, बीमारी है जनाब!

Wed, 12 Dec 2018 11:35 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
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office fight
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आशुतोष मिश्र
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गोरखपुर। रमेश कुमार (काल्पनिक नाम) अपनी कंपनी में एक विभाग के प्रभारी हैं। 12-15 अधीनस्थ। पर मजाल क्या कोई उनके सामने चूं भी कर दे। किसी पर नाराज हो जाएं तो उनकी दहाड़ से दफ्तर की दीवारें तक हिल जाती हैं। अब रमेश बाबू को क्या पता कि वह जिसे अपनी हनक समझ रहे हैं वह एक मानसिक बीमारी है। इंपल्स कंट्रोल डिसऑर्डर। इससे धीरे-धीरे न केवल उनकी कार्यक्षमता में कमी आ सकती है बल्कि उनकी नींद भी उड़ सकती है। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा हो तो मनोचिकित्सक से मिल आएं वरना इस बीमारी के शिकार तो अक्सर नौकरी गवांने के बाद पहुंचते हैं।
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दरअसल, होता यह है कि गुस्सा काबू न कर पाना मातहतों के मामले में तो मनो-मस्तिष्क पर पड़ने वाले असर तक सीमित रहता है। क्योंकि मातहत नौकरी बचाने के फेर में यह सब सह लेते हैं। और तो और, कई बार तो बॉस भी ऐसा करने वाले को कड़क अफसर मान लेते हैं। सावधान इसलिए रहना चाहिए कि जिनमें इंपल्स कंट्रोल डिसऑर्डर का असर बढ़ जाता है, वे असहमति होने पर अपने बॉस तक से ऊंची आवाज में बोल बैठते हैं। नतीजा नौकरी से छुट्टी। केजीएमयू के पूर्व मनोचिकित्सक डॉ. गोपाल अग्रवाल तो बताते हैं कि इस महीने पांच ऐसे लोग उनकी क्लिनिक पर आए, जो बॉस से गुस्से में बात करने के कारण नौकरी गवां चुके थे। इनमें एक युवक तो चार संस्थानों से इसी डिसऑर्डर के चलते निकाला गया था।

पांच दिन का कार्य सप्ताह ताकि कम हों ये परेशानियां

डॉ. गोपाल अग्रवाल के मुताबिक कुछ लोग गुस्सैल होते हैं, लेकिन अगर वह दफ्तर में इस पर काबू नहीं कर पाते तो भविष्य में उनकी कार्यक्षमता घटने लगती है। इंपल्स कंट्रोल डिसऑर्डर आगे चलकर नींद न आने की समस्या में बदल सकता है। कुछ के लिए तो काम की व्यस्तता ही अवसाद का कारण बन जाती है। इसके चलते ही सप्ताह में पांच दिन काम और दो दिन छुट्टी की व्यवस्था बनाई गई है।

उपाय है, दिमाग को सुकून दें तनाव-नकारात्मकता से बचें

इंपल्स कंट्रोल डिसऑर्डर से बचने का उपाय सरल है। ब्रेन ट्रेनर (न्यूरोलॉजिकल लिंग्विस्टिक प्रोग्रामर) प्रतिमा शाही बताती हैं कि दिमाग को आराम दें। नकारात्मकता से बचें। सकारात्मक बातें सोचें और करें। इससे नकारत्मकता से पैदा होने वाले तनाव और इसके कारण कार्यक्षमता में आने वाली गिरावट से बच सकते हैं। दिमाग को आराम न मिले तो इंसोम्निया (नींद न आना) के खतरे बढ़ जाते हैं।
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