गोरखपुर। तीमारदारों से मारपीट और बवाल के मामले में एफआईआर दर्ज होने से नाराज बीआरडी मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों ने सोमवार को इमरजेंसी, ओपीडी में इलाज ठप कर दिया। साथ ही प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार के दफ्तर के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। इससे मरीज और उनके तीमारदारों को जबरदस्त परेशानी हुई। गंभीर मरीजों को भी इलाज के बगैर ही लौटना पड़ा है।
मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ गुलरिहा थाने में मारपीट, बलवा, लूट और हत्या के प्रयास का मुकदमे दर्ज हुआ है। इससे नाराज जूनियर डॉक्टरों ने सोमवार को सुबह से ही हड़ताल कर दिया। गंभीरावस्था में देवरिया की मेवाती देवी, महराजगंज के रामजी, कुशीनगर की राधा, गोरखपुर सोनबरसा की संजू, सिद्धार्थनगर के रामलगन पांडेय, मुराली देवी और फरेंदा से आई पूनम गुप्ता को मेडिकल कॉलेज लाया गया लेकिन भर्ती नहीं नहीं मिली। इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी में पहले से जो मरीज थे, उन्हें भी इलाज नहीं मिल सका। इस वजह से तमाम मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पताल जाना पड़ा।
बातचीत बेनतीजा
जूनियर डॉक्टरों के प्रदर्शन की सूचना मिली तो एसपी नार्थ रोहित सिंह सजवाण पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। मेडिकल कॉलेज में ही एसपी नार्थ, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार की जूनियर डॉक्टरों से कई राउंड बातचीत हुई लेकिन मामला सुलझ नहीं सका। जूनियर डॉक्टरों की मांग थी कि मुकदमा तत्काल स्पंज किया जाए, जिसपर सहमति नहीं बन सकी। एसपी नार्थ कुछ समय मांग रहे थे। लेकिन जूनियर डॉक्टर नहीं तैयार हुए और प्रदर्शन करते रहे।
दोपहर बाद प्राचार्य दफ्तर के बाहर लगाई ओपेन ओपीडी
दोपहर 12 बजे के बाद जूनियर डॉक्टरों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया और प्राचार्य दफ्तर के बाहर ही ओपेन ओपीडी की नोटिस लगाकर मरीजों को देखने लगे। अपराह्न तीन बजे के बाद टेंट लगाकर इमरजेंसी के मरीजों को देखना शुरू किया। उनका कहना था कि मांगों पर अमल होने तक मेडिकल कॉलेज के भवन में मरीज नहीं देखेंगे।
विभागाध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी
ओपेन ओपीडी में महिला मरीजों को देखने पर मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रीना श्रीवास्तव ने आपत्ति जताई। हालांकि जूनियर डॉक्टर नहीं माने। इसी बीच कुछ जूनियर डॉक्टरों ने स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी की।
जूनियर डॉक्टरों की प्रमुख मांगें
इमरजेंसी वार्ड और ओपीडी में सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएं।
सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाए। इमरजेंसी में प्राइवेट गार्ड भी लगाए जाएं।
मरीज के साथ वार्ड में एक तीमारदार के रहने की अनुमति मिले।
मीडिया में आने वाली गलत खबरें रोकी जाएं।
ओपेन ओपीडी में 385 मरीज देखने का दावा
जूनियर डॉक्टरों ने ओपेन ओपीडी में 385 मरीजों को देखने का दावा किया। साथ ही कहा कि इमरजेंसी के 54 मरीज देखे गए हैं। जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन की महासचिव डॉ. वर्तिका तिवारी ने कहा कि कुछ दिन पहले तीमारदारों ने डॉक्टर को मारापीटा था। डॉक्टरों को चोट लगी थी। मुकदमा भी दर्ज हुआ था। अब डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके प्रताड़ित करने की साजिश रची गई है। जूनियर डॉक्टरों ने संस्थान में अपनी सुरक्षा के लिए विरोध प्रदर्शन का सहारा लिया है। जब तक मांगें नहीं मानी जाएंगी, तब तक विरोध जारी रहेगा।
मुकदमा स्पंज नहीं किए जाने तक विरोध जारी रहेगा। इमरजेंसी के मरीजों को ओपेन ओपीडी में देखा जा रहा है। इमरजेंसी के मरीजों के इलाज की व्यवस्था भी मुख्य भवन से बाहर की गई है।
डॉ. वर्तिका तिवारी, महासचिव जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन