कॉलेज लाइफ की यादें लिए हुए पुरातन छात्रों का काफिला आईटीआरसी हॉल की तरफ बढ़ रहा था। ढोल-नगाड़ों के बीच चल रहे स्वागत के बाद जो पहले से यहां पहुंच गए थे, वे अपने जिगरी यारों को तलाशने में जुटे थे। सालों बाद आमना-सामना होने के बाद भी एक-दूसरे को पहचान नहीं पा रहे थे। थोड़ी मशक्कत के बाद जब पहचान हुई तो कॉलेज लाइफ के दौरान एक-दूसरे को जिन नामों से अलंकृत करते थे, उसे दोबारा याद किया, गले मिले और सेल्फी ली।
मौका था एमएमएमयूटी में आयोजित पुरातन छात्र सम्मेलन का। ज्यादातर पुरातन छात्र परिवार के साथ यूनिवर्सिटी पहुंचे थे। मुख्य अतिथि प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने मालवीय विश्वविद्यालय और मालवीय पुरातन छात्र परिषद की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।
सम्मेलन में गोल्डन जुबली बैच 1967, सिल्वर जुबली बैच 1992 और डिकेड बैच 2007 के पुरातन विद्यार्थी शामिल हुए। सम्मेलन में 1966 से लेकर अब तक के कई पुरातन छात्र भी शामिल हुए। इस दौरान पुरातन छात्र परिषद के गोपाल मिश्र, जवाहर लाल, प्रो. केजी उपाध्याय, डॉ. गोविंद पांडेय आदि मौजूद थे।
पांच पुरातन छात्र हुए सम्मानित
सम्मेलन को खास बनाने के लिए इस बार विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान वाले पुरातन छात्रों को सम्मानित किया गया। इनमें पूर्वोत्तर रेलवे के वरिष्ठ उप महाप्रबंधक पीएन राय, प्रशासनिक क्षेत्र से गोरखपुर जोन के आईजी मोहित अग्रवाल, समाजसेवा के लिए ब्लासम एकेडमी के निदेशक आरएस सिंह, उद्यमिता से शिवेंद्र जुनेजा और कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में राजेश श्रीवास्तव को मुख्य अतिथि ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
‘कोई मंत्री विद्या के मंदिर को गोद नहीं ले सकता’
सम्मेलन में पुरातन छात्र परिषद के अध्यक्ष इंजीनियर जेबी राय ने प्राविधिक शिक्षा मंत्री से विश्वविद्यालय को गोद लेने की पेशकश की। इसपर मंत्री आशुतोष टंडन ने चुटीले अंदाज में कहा कि गोद मां गोद लेती है। यहां मां मालवीय एल्यूमिनाई एसोसिएशन है। कोई मंत्री विद्या के मंदिर को गोद नहीं ले सकता है। विश्वविद्यालय के विकास के जिम्मेदार प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजें। योगी सरकार उन्हें हरसंभव मदद देगी। इस दौरान उन्होंने खुद ही विश्वविद्यालय के पुरातन छात्र परिषद से जुड़ने की मंशा भी जताई।