गोरखपुर। सेंट एंड्रयूज कॉलेज के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट की ओर से आयोजित कार्यशाला के दूसरे दिन कार्यक्रम समन्वयक वैज्ञानिक डॉ. नंदलाल मिश्रा ने कहा कि रेडियो आइसोटोप्स का इस्तेमाल चिकित्सा विज्ञान, औद्योगिक क्षेत्र और रसायन अनुसंधान में बेहद कारगर है। इन क्षेत्रों में रेडियो आइसोटोप्स के आने से रसायन विज्ञान का दायरा और व्यापक हो गया है।
द्वितीय सत्र में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर मुंबई के डॉ. नरेंद्र शुक्ला और डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने न्यूक्लियर साइंस और रेडियो आइसोटोप्स विषय पर चर्चा करते हुए आयु की गणना पर प्रकाश डाला। एक अन्य प्रयोग में गामा किरण स्पेक्ट्रोमेट्री के विभिन्न मानकों का निर्धारण कराया। वैज्ञानिक डॉ. संजय सालुके ने जीएम काउंटर के विभिन्न मानकों पर चर्चा की। प्रत्येक प्रतिभागी ने इन प्रयोगों को वैज्ञानिकों की देखरेख में स्वयं करके देखा। रेडियो सक्रियता खतरनाक है, इस भ्रम को दूर किया। विभिन्न सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों के मन से रेडियोएक्टिव पदार्थों का डर दूर किया।