गोरखपुर।
बहरामपुर हनुमान गढ़ी के पास राप्ती नदी में नहाने के दौरान डूबे तीन किशोरों का शव बृहस्पतिवार को मिल गया। गोताखोरों ने अमन और अनिकेत का शव राजघाट पुल के पास से और पंकज का शव बाघागाड़ा फोरलेन पुल के पास से निकाला। शव मिलने के बाद मौके पर मौजूद किशोरों के घर वालों में चीख-पुकार मच गई। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से लोगों को संभाला।
तिवारीपुर थाना क्षेत्र के मिर्जापुर निवासी अमन (14) पुत्र कैलाश गुप्ता, अनिकेत (13) पुत्र दिनेश अग्रहरि, पंकज (14) पुत्र सीताराम कुशवाहा और ऋषि (14) पुत्र मनोज अग्रहरि बुधवार की शाम करीब पांच बजे बहरामपुर हनुमानगढ़ी के पास राप्ती नदी में नहाने गए थे। इस दौरान अमन, अनिकेत और पंकज गहरे पानी में चले गए। ऋषि ने दोस्तों को बहता देखकर शोच मचाया। इसके बाद से तीनों की तलाश में पुलिस और एनडीआरएफ के गोताखोर लगाए गए, लेकिन रात हो जाने से उन्हें खोजा नहीं जा सका। बृहस्पतिवार की सुबह एक-एक कर तीनों किशोर के शव निकाले गए। तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया लेकिन शाम हो जाने से पोस्टमार्टम नहीं हो सका। इनका पोस्टमार्टम शुक्रवार को कराया जाएगा।
इनसेट
मौज-मस्ती करने गए थे चारों दोस्त
तीन दोस्तों को खोकर ऋषि बेसुध नजर आया। वह कभी रोने लगता तो कभी कमरे में जाकर अकेले बैठ जाता। घर वाले उसे समझाने का प्रयास कर रहे थे। उसने बताया कि चारों दोस्त साथ में ही मौज-मस्ती करने गए थे। हम लोगों ने किनारे ही नहाने को सोचा था, लेकिन अमन, अनिकेत और पंकज तेज बहाव में बह गए। फंसा तो मैं भी था, लेकिन मैं किसी तरह से हाथ-पैर मारकर बच गया। इसके बाद मैंने आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी। अमन के पिता कैलाश गुप्ता सब्जी मंडी में व्यापार करते हैं, जबकि अनिकेत के पिता दिनेश अग्रहरि का बोरे का कारोबार है। पंकज के पिता सीताराम कुशवाहा टीन के व्यापारी हैं।
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कक्षा नौ के छात्र थे पंकज और अनिकेत
पंकज और अनिकेत मारवाड़ इंटर कॉलेज में कक्षा नौ के छात्र थे, जबकि अमन लखनऊ के एक कॉलेज में पढ़ रहा था। वह कुछ दिन पहले ही छुट्टी पर घर आया था। पंकज पांच भाइयों में सबसे छोटा था, जबकि अमन दो भाइयों में छोटा था। अनिकेत तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर था।
साइड स्टोरी
एक ही कॉलोनी में तीन मौतों से मचा कोहराम
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर।
तीन किशोरों के नदी में डूबने की घटना ने कॉलोनी के लोगों को झकझोर कर रख दिया है। जीवित्पुत्रिका व्रत के दिन ही तीन घरों में चीख-पुकार मच गई। तीनों परिवारों के साथ ही आसपास के लोग भी बच्चों की मौत पर गमगीन नजर आए। सुबह से ही किशोरों के घर पर लोग ढांढस बंधाने पहुंचते रहे। कॉलोनी के लोग भी किशोरों की बातें कर भावुक हो जा रहे थे। तीनों चंचल और सबके चहेते थे।
अमन तीन दिन पहले ही लखनऊ से घर आया था। वह घर में सबका दुलारा था। शाम के समय खेलने की बात कहकर वह घर से निकला था, इसके बाद वह नहीं लौटा। काफी दिन बाद जब वह तीनों दोस्तों से मिला तो सभी ने बुधवार को राप्ती नदी में नहाने की योजना बना ली। ऐसा नहीं कि वे पहली बार नहाने गए थे। इसके पहले भी वे यदा-कदा नहाने के लिए नदी में ही जाते थे, लेकिन इस बार अनहोनी उनके पीछे लगी थी।