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सावन के अंतिम सोमवार को भी हर-हर महादेव से गूंजे शिवालय

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सावन के अंतिम सोमवार को मुक्तेश्वर नाथ मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु। - फोटो : Amar Ujala
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गोरखपुर।
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सावन के अंतिम सोमवार को शिवालयों में भक्तों ने भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर जलाभिषेक किया। भक्तों ने भोले नाथ को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग का भांग, धतूरा, बेलपत्र से शृंगार किया। इस दौरान हर-हर महादेव के नारों की गूंज से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान रहा। कूड़ाघाट स्थित महादेव झारखंडी, मुक्तेश्वरनाथ, दाउदपुर काली मंदिर, बेतियाहाता हनुमान मंदिर परिसर स्थित शिवमंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया। भीड़ बढ़ने के साथ जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की लाइन भी लंबी होती गई। श्रद्धालुओं की सुविधाओं को देखते हुए ट्रांसपोर्टनगर स्थित मुक्तेश्वरनाथ और झारखंडी स्थित शिव मंदिर में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग लाइन की व्यवस्था की गई थी। इसके साथ ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी किए गए थे। बेतियाहाता हनुमान मंदिर स्थित शिव मंदिर में पूजन-अर्चन के लिए भक्तों की टोलियां लगातार आ रही थीं। इस दौरान भक्तों ने श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर मन्नतें मांगी।

27 साल बाद बना अद्भुत संयोग
गोरखपुर। मुक्तेश्वरनाथ मंदिर के पुजारी रामनाथ उपाध्याय ने बताया कि इस बार 27 साल बाद ऐसा संयोग बना कि सावन का पहला और अंतिम दिन सोमवार रहा। यही नहीं इस सावन में पांच सोमवार का भी योग था। इस सावन में जिसने पांचों सोमवार भगवान भोले की आराधना के साथ व्रत रखा होगा, उस पर भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होगी। उन्होंने बताया कि अब कितने साल बाद फिर ऐसा संयोग बने किसी को नहीं पता।
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सावन में भोलेनाथ की पूजा बचपन से करती आ रही हूं। हर सोमवार व्रत रहकर शिव की पूजा करती हूं। इस बार सावन में सभी पांच सोमवार को परिवार के साथ अलग-अलग मंदिरों में जाकर जलाभिषेक किया है।
- सिंधू

मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ को सावन में भांग-धतूरा, बेलपत्र चढ़ाने से वह प्रसन्न होते हैं। भक्त शिव को जल चढ़ाने के बाद इन सामग्रियों से उनका शृंगार करते हैं। सावन के सभी सोमवार को मैने परिवार के साथ भोलेनाथ का शृंगार कर जलाभिषेक किया।
- चांदनी

शादी के बाद से हर सावन में इलाहाबाद से गोरखपुर आती हूं। मेरे साथ पति भी आते हैं। हम दोनों हर सोमवार बाबा मुक्तेश्वरनाथ के दर्शन कर उनका शृंगार करते हैं। इस बार पांच सोमवार का शुभ संयोग बना तो दोनो लोगों ने व्रत रखकर भोले नाथ की उपासना की।
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- सरिता सोनी

सावन में झारखंडी महादेव और मुक्तेश्वरनाथ मंदिर में जल चढ़ाती हूं। सावन में सोमवार के व्रत का अपना अलग महत्व हैं। मुक्तेश्वर नाथ मंदिर में सच्चे मन से शिव की पूजा अर्चना करने वाले की सभी मन्नतें पूरी होती हैं।
- रेखा वर्मा
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