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खुदकुशी या कुछ और, वजह तलाश रही पुलिस

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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर।
शुगर की जांच कराने निकले डॉ. आशीष रंजन का शव राप्ती नदी में मिलने के बाद कई सवार खड़े हो गए हैं। पुलिस की जांच में भले ही मामला प्रथम दृष्टया खुदकुशी का लग रहा हो, लेकिन इसके पीछे की वजह और अन्य पहलुओं पर भी जांच चल रही है। बताया जाता है कि उनका उनकी पत्नी डॉ. बरसा से संबंध ठीक नहीं था। पुलिस इस पहलू पर भी काम कर रही है। फिलहाल पत्नी बरसा ने इस मामले में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है।
डॉ. आशीष 11 जुलाई की सुबह शुगर की जांच कराने निकले थे। इसके बाद वह घर नहीं लौटे। उनके लापता होने के 24 घंटे तक पुलिस को सूचना नहीं दी गई। इसके बाद कैंट थाने पहुंची पत्नी ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। मोबाइल की लोकेशन के आधार पर पुलिस ने राजघाट पुल पर पहुंचकर जांच की तो वहां लावारिस हाल में बाइक और फिर नदी से डॉक्टर का शव मिला। शव मिलने के बाद भाई, पत्नी भी मौके पर पहुंच गए। पत्नी ने भी पति के डिप्रेशन और शुगर से पीड़ित होने की जानकारी दी। दूसरी ओर ड़ॉ. बरसा के हाथ में गंभीर चोट के निशान देखे गए। पुलिस सूत्रों की माने तो पत्नी के हाथ पर निशान ऐसे हैं, जैसे नस काटने की कोशिश की गई हो। जांच में यह भी पता चला है कि पति से विवाद के बाद वह इलाहाबाद स्थित मायके चली गई थीं। हालांकि घर वाले इससे इंकार कर रहे हैं, मगर पुलिस इन पहलुओं पर भी जांच कर रही है। डॉ. बरसा और डॉ. आशीष रंजन की शादी करीब दो साल पहले हुई थी। दोनों को कोई औलाद नहीं है।
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पत्नी से बात करने के बाद निकले थे घर से
11 जुलाई की सुबह 10:20 बजे पत्नी डॉ. बरसा की आखिरी बार उनके पति से मोबाइल फोन पर बात हुई थी। इसके बाद ही डॉ. आशीष घर से निकले थे। इसके 48 घंटे बाद उनका शव राप्ती नदी से निकाला गया। पत्नी से आखिरी बार उनकी क्या बात हुई थी, यह कोई नहीं जानता। इस बाबत जब पुलिस ने उनसे सवाल किया तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।

पांच भाइयों में चौथे नंबर पर थे डॉ. आशीष
डॉ. आशीष रंजन पांच भाइयों में चौथे नंबर पर थे। बड़े भाई अखिलेश रंजन हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं। दूसरे नंबर के भाई अमित रंजन सेना में अधिकारी हैं। तीसरे नंबर के डॉ. असीम उरुवा में प्रैक्टिस करते हैं और सबसे छोटा भाई आजाद रंजन पुणे में इंजीनियर है। हाई प्रोफाइल फैमिली में खुदकुशी से मातम छाया हुआ है।
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सक्रिय होती राजघाट पुलिस तो न झेलनी पड़ती सांसत
राजघाट पुलिस ने 12 जुलाई को ही डॉक्टर की बाइक लावारिस हाल में बरामद कर ली थी, लेकिन उसने एक बार भी यह जानने की कोशिश नहीं की कि आखिर यह बाइक किसकी है। अगर पुलिस ने उसी दिन बाइक के बारे में पता किया होता तो कैंट पुलिस को इतना परेशान न होना पड़ता। जांच करने पहुंची कैंट पुलिस को एक स्थानीय नागरिक ने लावारिस बाइक के बारे में जानकारी दी थी जिसके बाद राजघाट पुलिस से तस्दीक की तो वह डॉक्टर की निकली। लंबा समय गुजर जाने से पुलिस को 13 जुलाई को शव बरामद करने में दस घंटे लग गए।
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