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‘आत्म अनुशासन से ही बेहतर कानून व्यवस्था’

Wed, 06 Feb 2019 01:13 AM IST
ajay Kumar अमर उजाला ब्यूूूराे
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अपराजिता में बाोलते मुख्य वक्ता - फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। हर व्यक्ति ने खुद को कानून की सीमाओं में बांध रखा है। आत्म अनुशासन सेे ही कानून-व्यवस्था बेहतर बनी हुई है। पुलिस की इतनी संख्या नहीं है कि वो हर व्यक्ति सेे कानून का अनुपालन करा सके। व्यक्ति आत्म अनुशासित हो जाए तो किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी। ये बातें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एसीजेएम सुरेंद्र सिंह ने अपराजिता मुहिम के तहत सर माउंट इंटरनेशनल स्कूल तारामंडल में आयोजित कानून की पाठशाला में कहीं।
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स्कूल ऑडिटोरियम में विद्यार्थियों के बीच सचिव शिक्षक की भूमिका में दिखे। कानून की जानकारी दी और उसके अनुपालन का मंत्र भी दिया। उन्होंने ‘जो जागत है सो पावत है, जो सोवत है सो खोवत है’ लोकोक्ति का जिक्र किया। कहा कि जागरूकता से कानून का लाभ उठाया जा सकता है। कानून की पाठशाला में पहुंचे अलग-अलग क्षेत्र के विशेषज्ञ अधिवक्ताओं ने भी जानकारी दी। सिविल कोर्ट अधिवक्ता योगेश कुमार मौर्य ने कहा कि ‘बच्चों के प्रति अपराध’ और ‘बच्चों द्वारा अपराध’ दोनों प्रवृत्तियां बढ़ी हैं। ऐसे में अमर उजाला की अनूठी मुहिम रंग लाएगी।

कानून की सही जानकारी के बाद कोई व्यक्ति अपराध नहीं करेगा। उपभोक्ता मामलों के अधिवक्ता सरदार दुर्गेश सिंह ने बच्चों को उपभोक्ता हित के बारे में विस्तार से बताया। कहा कि जो भी सामान खरीदें, उसकी रसीद लें। यदि सामान खराब है तो उपभोक्ता फोरम में चुनौती दी जा सकेगी। एडवोकेट शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि 16 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले विद्यार्थी ही बिना गियर वाली गाड़ी चला सकते हैं। एडवोकेट प्रदीप कुमार त्रिपाठी ने संविधान का सम्मान करने की अपील की। पाठशाला का संचालन अधिवक्ता अरविंद राम त्रिपाठी ने किया और कहा कि हर बेटी अपराजिता है। अरविंद राम ने विद्यार्थियों के सवालों के जवाब भी दिए।
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स्कूल के चेयरमैन आरडी यादव और प्रिंसिपल दीपिका अरोड़ा ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के स्वागत किया। इसके बाद नारी गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने की शपथ ली गई। पाठशाला के सफल आयोजन में सर माउंट स्कूल के प्रभाकर शुक्ला, अनूप तिवारी, यास्मीन, तलत परवीन, प्रियंका, अंशुमान चतुर्वेदी, अनुराधा शुक्ल, मनीष, बबिता, राजेश गुप्ता और मुकेश श्रीवास्तव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

विद्यार्थी की बात

शिक्षा का अधिकार सबको है, यह जानकारी कानून की पाठशाला से मिली है। यदि कोई व्यक्ति अपने बेटे को पढ़ाता है और बेटी को नहीं तो ऐसी स्थिति में कानून की मदद ली जा सकती है।
अंशिका यादव, छात्रा

न्यायपालिका को नजदीक से समझने का मौका मिला है। जज और अधिवक्ताओं ने कानून से संबंधित जो जानकारी दी, वह रोजाना की दिनचर्या में शामिल है। इसका अनुपालन सुनिश्चित करेंगे।
अदिति श्रीवास्तव, छात्रा

कानून ने सबको समान अधिकार दिए हैं। मेरी सोच थी कि बड़े लोग कानून से बचकर निकल जाते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। पाठशाला से आत्मसात करने वाली जानकारी मिली है।
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साक्षी दुबे, छात्रा
 
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