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तत्काल टिकट का साफ्टवेयर बेचने वाले तीन गिरफ्तार

Sat, 07 Jul 2018 01:47 AM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
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चौरीचौरा (गोरखपुर)। एसडीएम चौरीचौरा के सरकारी आवास के पीछे रहने वाले एक इलेक्ट्रानिक उपकरण के व्यापारी समेत तीन लोगों को अहमदाबाद रेलवे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। तीनों पर ही तत्काल टिकट का साफ्टवेयर तैयार कर बेचने का आरोप है। गुजरात से मुर्गेश नाम के एक शख्स के गिरफ्तारी के बाद खातों की जांच में तीनों युवक की पहचान हुई और फिर टीम मुर्गेश के साथ ही गोरखपुर पहुंची थी। तीनों से चौरीचौरा थाने में देर रात तक पूछताछ जारी थी। बताया जा रहा है कि मुख्य सरगना बंगाल का है जिसकी गिरफ्तारी को टीम रवाना होगी।
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अहमदाबाद रेलवे में सब इंस्पेक्टर संजय बावने के नेतृत्व में टीम गोरखपुर आई है। संजय ने बताया कि कुछ दिनों पहले मुर्गेश पटेल की गिरफ्तारी हुई थी। तब जांच में पता चला कि यह लोग ऐसे साफ्टवेयर को तैयार करते है जिसके इस्तेमाल से रेलवे की वेबसाइट से जल्दी टिकट बुक हो जाता है। यह सरकारी वेबसाइट से 30 गुना ज्यादा तेजी से काम करता है। इनका साफ्टवेयर एक महीने ही काम करता है फिर दोबारा बनाना होता है। जांच पड़ताल में खातों को देखा गया तो गोरखपुर के तीन युवकों से हर महीने लेनदेन हुई है। पकड़े गए युवकों की पहचान भोपा बाजार निवासी ताबीज, जावेद और सहजिद के रूप में हुई। ताबीज की भोपा बाजार में सन्नी इंटरप्राइजेज नाम से दुकान है। वह कंप्यूटर कोर्स किया है।

बस्ती से पकड़ा गया था हैकर

29 अप्रैल 2016 को बस्ती के कप्तानगंज निवासी हामिद अशरफ को हैक कर टिकट बनाने के आरोप में पकड़ा गया था। तब मुंबई, बंगलुरु तथा लखनऊ की सीबीआई टीम ने संयुक्त छापेमारी की थी। हामिद के पास से 10 लैपटॉप, 16 लाख रुपये कैश, 80 सिम कार्ड, 17 बैंक एकाउंट के पासबुक बरामद हुए थे।

30 सेकेंड में बुक देते थे टिकट

भले ही आईआरसीटीसी पर अपने अकाउंट्स से टिकट बुकिंग में कई मिनट लगें लेकिन फर्जी साफ्टवेयर के जरिए या फिर उसे हैक करके औसत 30 सेकेंड में कई टिकट तैयार कर लेते। सरकारी सेवा से तेज सेवा होने की वजह से यह टिकट को मुंहमांगे दामों पर बेचते है।

ऐसे काम करते है साफ्टवेयर

 सॉफ्टवेयर में पहले ही टिकट से जुड़ी सारी जानकारियां जैसे पैसेंजर का नाम, उम्र, यात्रा तिथि, ट्रेन नंबर फीड कर लेते हैं
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 बुकिंग के लिए सर्वर शुरू होने के साथ साइट को हैक कर लिया जाता था और पहले से तैयार टिकट जनरेट करने के लिए डाटाबेस साइट पर अपलोड किया जाता
 सॉफ्टवेयर के जरिये एक साथ सैकड़ों टिकट का पेमेंट होता था और पीएनआर जनरेट हो जाते थे। टिकट को बाद में प्रिंट किया जाता था।
 टिकट के ऑर्डर पहले ही ले लिए जाते हैं और टिकट डिलेवरी के बाद रुपये अकाउंट में जमा करा दिए जाते थे
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