गोरखपुर।
बीआरडी कांड में अभियुक्त सुधीर कुमार पांडेय की जमानत अर्जी अपराध की गंभीरता को देखते हुए विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम राकेश धर दुबे ने खारिज कर दी। अभियुक्त के खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज है।
अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता इंदल यादव का कहना था कि बीआरडी में प्रशासन की चिकित्सकीय सेवा में लापरवाही के चलते बच्चों की मौत हो गई थी। इस संबंध में जांच के बाद महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. केके गुप्ता ने 23 अगस्त को हजरतगंज लखनऊ में निलंबित प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा, उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, लेखा विभाग में कार्यरत सुधीर कुमार पांडेय, डॉ. कफील खान समेत अन्य लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कराया था। अभियुक्त सुधीर कुमार पांडेय ने अदालत के समक्ष जमानत के लिए अर्जी दी। इसमें कहा कि वह निर्दोष है। शासन अपनी जवाबदेही से बचने के लिए उसे फर्जी ढंग से अभियुक्त बना दिया है। अभियोजन पक्ष की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र का जोरदार विरोध किया और कहा गया कि अभियुक्त लेखा विभाग में कार्यरत है। कंपनियों से धन वसूल कर बिल का भुगतान किया जाता था। घटना में अभियुक्त की संलिप्तता है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियुक्त की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।