गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश की यूनिवर्सिटी सिर्फ डिग्री बांटने तक सीमित न रहें, बल्कि स्थानीय जरूरतों को महसूस करते हुए शोध करें। लोगों का जीवन स्तर सुधारने वाला उपयोगी शोध पत्र शासन के समक्ष प्रस्तुत करें ताकि उसे अमल में लाकर विशेष कार्यक्रम चलाए जाएं। इससे निश्चित ही बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
ये बातें उन्होंने गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षा भवन में प्रतिमा अनावरण समारोह में कहीं। इसके पूर्व मुख्यमंत्री ने कुलाधिपति के साथ प्रशासनिक भवन में लगी पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान कुलाधिपति ने गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी संस्थाएं सिर्फ अनुदान पर निर्भर होकर नहीं चल पाएंगी। उन्हें आत्मनिर्भर बनना होगा। यूनिवर्सिटी और कॉलेज समाज में आमूलचूल परिवर्तन करने में महत्वपूर्ण योगदान निभा सकते हैं। योगी ने कहा कि हमने लोगों में साक्षरता का भाव पैदा ही नहीं किया और जीवन को औपचारिक बना दिया। अगर नौकरी मिली तो जवाबदेही तय नहीं हुई। सरकारी योजनाएं लोगों तक पहुंची ही नहीं, दलाली की शिकार हो गईं। प्रधानमंत्री ने डिजिटल ट्रांसफर की शुरूआत की है। अब समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाएं पहुंचेंगी।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार जगदीश उपासने ने कहा कि छह दशकों में सिर्फ एक विचारधारा को बढ़ाने की कोशिश हुई। संत, ऋषि, शिक्षाविद्, वैज्ञानिकों के बारे में सोचा ही नहीं गया। उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय के एकात्मवाद में मूल से लेकर अनंत चराचर शामिल है। राम मनोहर लोहिया और उनके विचारों में समानता थी। राजनीतिक कटुता के समय यह बेहतर उदाहरण है। अथितियों का स्वागत गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. वीके सिंह तथा संचालन प्रो. हर्ष सिन्हा ने किया। इस दौरान पूर्व कुलपति प्रो. यूपी सिंह, प्रो. राम अचल सिंह, प्रो. राजेंद्र प्रसाद, प्रो. रजनीकांत पांडेय, प्रो श्रीनिवास सिंह, प्रो. योगेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
मुंबई की झोपड़ पट्टी से सीखा एकात्मवाद
गोरखपुर। कुलाधिपति राम नाईक ने कहा कि उन्हें पंडित दीनदयाल को सुनने और समझने का अवसर मिला। उनके एकात्मवाद को उन्होंने आत्मसात करने की कोशिश की। कहा कि जनप्रतिनिधि को जनता के व्यवहार और जरूरत को समझते हुए काम करना चाहिए। आपके कार्य से दूसरे विचारधारा के लोग ईष्या रख सकते हैं लेकिन परवाह नहीं करनी चाहिए।
पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए एक संदर्भ के जरिये उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय के एकात्मवाद को परिभाषित किया। बोले, जनसंघ से जुड़कर कार्य कर रहा था। मध्यमवर्ग परिवार से था, उस दौरान कांग्रेस का बोलबाला था। मुंबई की झोपड़ पट्टी में रहने वालों से जुड़ना बहुत दुष्कर था। वे गंदगी के बीच रहते थे। हमने दीन दयाल जी से चर्चा की। उन्होंने घर में गौरिया के घोंसले के हटाने को लेकर अपनी नानी द्वारा दी गई नसीहत का जिक्र किया। कहा कि घोंसले से पढ़ाई में दिक्कत होती थी, जब हटाने गए तो नानी कहा कि तुम्हें घोंसला बनाते समय रोकना चाहिए था अब उसे कहीं और बसाने का प्रयत्न करो। दीन दयाल जी ने कहा कि झोपड़ पट्टी में जाकर संगठन बनाओ। मैंने उनकी नसीहत को अमल में लाकर और बड़ा संगठन तैयार कर लिया।
प्रदेश के 29 यूनिवर्सिटी में शुरू की प्रतिस्पर्धा
गोरखपुर। कुलाधिपति ने कहा कि प्रदेश की 29 यूनिवर्सिटी में मैंने प्रतिस्पर्धा शुरू की है। इससे बेहतर करने की प्रवृति पैदा होगी। हर महीने रिपोर्ट मंगाता हूं और समीक्षा कर सुझाव भी देता हूं। पं. दीन दयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी वर्ष में उनके विचारों पर आयोजित कार्यक्रम में सबसे बेहतर आयोजन करने वाली यूनिवर्सिटी का चुना जाएगा।