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पंजीकरण के बाद भी नहीं हुई खरीद

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- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। किसानों की उपज का उचित मूल्य दिलाने और फसल की खरीद की तमाम प्रयासों के बाद भी किसानों के धान खरीद नहीं हो सकी है। जबकि इन किसानों ने कृषि विभाग के साइट पर धान बेचने के लिए पंजीयन भी कराया था। ऐसे में मजबूर कुछ किसानों बिचौलियों को अपना धान बेचा। दूसरी ओर, विपणन विभाग 40 हजार एमटी के सापेक्ष 36,669 मीट्रिक टन धान की खरीद कर चुका है। ऐसे में विभाग की खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं। फिलहाल 28 फरवरी तक धान की खरीद की जानी है।
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शोहरतगढ़ के चन्दई निवासी तबरेज आलम का कहना हैं कि शासन के दावे में तनिक भी सच्चाई नहीं है। उन्होंने अक्तूबर में धान बेचने के लिए पंजीयन कराया था। लेकिन वे धान नहीं बेच सके। पहले करीब डेढ़ माह क्रय केंद्र खुले नहीं। उसके बाद बोरे के अभाव में खरीद नहीं हुई। ऐसे में धान कहां से खरीदा गया। शासन को उन नामों का खुलासा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले साल की तरह इस साल भी बिचौलियों के हाथ धान बेचा गया है। खैरहनिया निवासी कमलेश शुक्ल ने कहा कि पिछले सत्र में 60 क्विंटल धान और 40 क्विंटल गेहूं बेचा था। लेकिन इस बार क्रय केंद्र न खुलने के कारण बिचौलिये के हाथों धान बेचना पड़ा। अचानक इतने धान कहां से खरीद लिए गए। औदही कलां निवासी अब्दुल माबूद ने बताया कि पिछले साल 120 क्विंटल गेहूं क्रय केंद्र पर बेचा था। लेकिन हड़ताल, क्रय केंद्रों के न खुलने के कारण इस बार प्राइवेट दुकानों पर बेचना पड़ा। भुतहवा निवासी मो.सफात का कहना है कि धान कटने के बाद किसान को फसल की कटाई, गेहूं के बीज, खाद के लिए धन चाहिए। जब डेढ़ महीने क्रय केंद्रों पर खरीदारी नहीं होगी तो मजबूरन बिचौलियों के हाथों अपने अनाज को औने-पौने दामों पर बेचना पड़ा। जिला विपणन अधिकारी संजय पांडेय ने बताया कि पारदर्शी तरीके से धान की खरीद की गई है। आठ दिनों में शेष बचे लक्ष्य को भी पूरा कर लिया जाएगा। बताया कि कही कोई भी गड़बड़ी नहीं की गई है।
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