महकमे के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों का प्रदर्शन व्यापक होता जा रहा है। बुधवार को विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति के सदस्यों ने सरकारी विभागों में जाकर कर्मचारियों से समर्थन मांगा और मोहद्दीपुर स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय पर दूसरे दिन भी बुद्धि-शुद्धि यज्ञ किया।
लगातार आठ दिनों से बिजलीकर्मियों का कार्य बहिष्कार जारी है। इससे विभाग को लगभग साढ़े नौ करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। बुधवार सुबह विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति के सचिव बृजेश त्रिपाठी के नेतृत्व में लोगों ने पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग जाकर अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों से समर्थन मांगा। सचिव ने कहा कि आज बिजली विभाग को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है, अगर सभी राज्य कर्मचारी एकजुट नहीं हुए तो बारी-बारी सरकार सभी विभागों को पूंजीपतियों को सौंप सकती है।
समिति के कुलदीप श्रीवास्तव ने कहा कि निजीकरण से विभाग को घाटा ही हुआ है। इस दौरान राहुल श्रीवास्तव, एके सिंह, एके श्रीवास्तव, घनश्याम मिश्र, अजय कुमार, राम इकबाल सिंह, जेपी यादव, दीपक गुप्ता, शशि कपूर आदि मौजूद रहे।
इन संगठनों ने दिया समर्थन
राजकीय पेंशनर्स प्रकोष्ठ, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ, बीटीसी शिक्षक संघ, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद संघ, ऑल इंडिया डिप्लोमा परिषद, भारतीय किसान संघ, पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ, गोरखपुर आईटीआई निजी फेडरेशन, राज्य कर्मचारी महासंघ, कायस्थ सामाजिक संस्था, युवा चेतना शक्ति, डिप्लोमा इंजीनियर संघ।
इमरजेंसी सेवा ही रहेगी चालू
बृजेश त्रिपाठी ने बताया कि कार्य बहिष्कार के दौरान बस इमरजेंसी सेवाएं ही दी जाएंगी। जैसे मेडिकल कॉलेज और सिविल अस्पताल को 24 घंटे सेवा जारी रहेगी। इसके अलावा शाम 5 बजे से अगले दिन सुबह 10 बजे तक किसी तरह का फाल्ट या कटौती होने पर विभाग की तरफ से कार्रवाई नहीं की जाएगी।
आज घर-घर जाकर मांगेंगे समर्थन
संघर्ष समिति के सदस्य बृहस्पतिवार को शहर के विभिन्न मोहल्लो में घर-घर जाकर समर्थन मांगेंगे और उपभोक्ताओं को निजीकरण से नुकसान की जानकारी देंगे। इसे पहले भी राप्तीनगर फेज चार में बिजलीकर्मियों ने घर-घर पर्चे बांटे थे।