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अनिश्चितकालीन हुई बिजलीकर्मियों की हड़ताल

Tue, 27 Mar 2018 09:13 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
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हवन करते बिजलीकर्मी। - फोटो : Amar Ujala
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बिजली महकमे के निजीकरण का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। सरकार के इस फैसले के विरोध में बिजलीकर्मियों के जारी कार्य बहिष्कार को अब दूसरे संगठनों ने भी समर्थन दे दिया है। इसके बाद बिजली विभाग के कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने 27 मार्च तक चलने वाली हड़ताल को अब अनिश्चितकाल तक जारी रखने का फैसला लिया है। इस प्रदर्शन के कारण बिजली विभाग के सभी दफ्तर एक हफ्ते से बंद चल रहे हैं। इस कारण महकमे को अब तक लगभग आठ करोड़ रुपये की चपत लग चुकी है।
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मोहद्दीपुर स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय पर मंगलवार को बिजलीकर्मियों ने बुद्धि-शुद्धि यज्ञ किया। इसमें दूसरे संगठनों के करीब दो हजार कर्मचारी भी शामिल हुए और उन्होंने प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया। संघर्ष समिति के सचिव बृजेश त्रिपाठी ने बताया कि अभी तक के प्रदर्शन में मंगलवार को अधिक भीड़ रही। प्रदर्शन शांतिपूर्वक चल रहा है, मगर जिला प्रशासन प्रदर्शन को खत्म कराने के लिए जोर जबदस्ती कर रही है।

समिति के कुलदीप श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा कर रही है, जबकि जहां-जहां सरकारी विभाग का निजीकरण हुआ, वहां सरकार को घाटा ही हुआ है। इस दौरान राहुल श्रीवास्तव, एके सिंह, एके श्रीवास्तव, घनश्याम मिश्र, अजय कुमार, राम इकबाल सिंह, जेपी यादव, दीपक गुप्ता, शशि कपूर आदि मौजूद रहे।
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इन संगठनों ने दिया समर्थन
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ, बीटीसी शिक्षक संघ, राज्य कर्मचारी परिषद संघ, ऑल इंडिया डिप्लोमा परिषद, भारतीय किसान संघ, पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ, गोरखपुर आईटीआई निजी फेडरेशन, राज्य कर्मचारी महासंघ, कायस्थ सामाजिक संस्था, युवा चेतना शक्ति, डिप्लोमा इंजीनियर संघ।

सरकार का फैसला कर्मचारी विरोधी है। इसे तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। हमारा संघ निजीकरण के विरोध में जारी प्रदर्शन का समर्थन करता है।
- अरविंद सोनकर, अध्यक्ष, एसटीएससी संघ

मंत्री, उर्जामंत्री, उपमुख्यमंत्री समेत अन्य सरकारी भवनों पर बिजली का बकाया है। सरकार इनका भुगतान करा दे तो राजस्व की कमी बहुत हद तक ऐसी ही कम हो जाएगी।
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- रूपेश श्रीवास्तव, अध्यक्ष, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद

बिजली विभाग का निजीकरण कर सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती है। इसे सरकारी कर्मचारियों का शोषण बढ़ जाएगा। यह बर्दाश्त नहीं होगा।
- दिनेश पांडेय, विद्युत तकनीकी एकता मंच

जब तक फैसला वापस नहीं लिया जाएगा प्रदर्शन चलता रहेगा। अगर किसी तरह की जोर जबरदस्ती हुई तो विद्युत आपूर्ति भी बाधित की जा सकती है।
- बृजेश त्रिपाठी, सचिव विद्युत तकनीकी एकता मंच
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