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मिल श्रमिकों ने मांगी इच्छा मृत्यु

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बस्ती शुगर मिल गेट पर धरना देते कर्मचारी। - फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। बस्ती चीनी मिल बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले मिल श्रमिकों ने सरकार से इच्छा मृत्यु मांगी है। ये श्रमिक मिल को दोबारा चालू कराने और अन्य मांगों को लेकर 1554 दिन से मिल गेट पर धरना दे रहे हैं। बृहस्पतिवार को मिल गेट पर धरने की अध्यक्षता कर रहे साहूपार के राम भरथ ने कहा कि प्रदेश सरकार मिल मैनेजमेंट पर दवाब नहीं बना पा रही है। अगर श्रमिकों के साथ न्याय नहीं किया जा सकता है तो उन्हें इच्छा मृत्यु की इजाजत ही दे दी जाए। श्रमिक इसके लिए तैयार हैं। इस दौरान वक्ताओं ने पीएम पर भी श्रमिकों के साथ धोखा देने का आरोप लगाया। कहा, पीएम का आश्वासन भी आजतक पूरा नहीं किया। इस मौके पर आशुतोष सिंह, सूर्यमणि चतुर्वेदी, सुरेंद्र मिश्र, दीनदयाल त्रिपाठी, अशोक सिंह, बृजेश कुमार सिंह, शिवगुलाम, राजकुमार, मेहीलाल, उत्तम श्रीवास्तव सहित अन्य मौजूद रहे।
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जारी हो चुकी है आरसी
बस्ती चीनी मिल के श्रमिकों के मामले में मिल प्रबंधन शुरू से ही मनमानी कर रहा है। बकाया के बावजूद भुगतान नहीं किया जा रहा। चीनी मिल मजदूर संघ बस्ती के मंत्री आशुतोष सिंह की ओर से श्रमिकों का अप्रैल से जून 2017 का वेतन 25,50,824 रुपये के भुगतान करने को लेकर उप श्रम आयुक्त के यहां वाद भी दायर किया गया था। इस मामले में आरसी भी जारी की चुकी है।

प्रबंधन ने समायोजन का वादा किया था
समिति के आशुतोष सिंह कहते हैं कि मिल बंद होने से पहले मिल प्रबंधन की ओर से बड़े-बड़े वादे किए गए थे। नियमित और सीजनल कर्मियों के समायोजन की बात कही थी। शासन और प्रशासन स्तर पर भी कई प्रयास किए गए, इसे लेकर कई बार डीएम और मिल प्रबंधन के साथ वार्ता भी हुई। प्रशासन की ओर से कार्रवाई करने की भी धमकी दी गई। इसी बीच केंद्र में भाजपा की सरकार बनी। सरकार बनने से पहले सांसद हरीश कई बार धरना स्थल पर आए और श्रमिकों के साथ धरने पर बैठे रहे। बावजूद सरकार बनी और कुछ नहीं हुआ।
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प्रधानमंत्री से भी मिल चुका है आश्वासन
सांसद की अगुवाई में श्रमिक और कर्मचारी नेता दिल्ली में पीएम से मिले थे। वहां पीएम ने प्रतिनिधि मंडल को मिल चलाने का आश्वासन भी दिया। मगर, इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ।
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