गोरखपुर।
गीता वाटिका में श्री चैतन्य महाप्रभु भाव कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को माधव गौडेश्वर वैष्णवाचार्य पुंडरीक गोस्वामी ने लोगों को शास्त्रीय ग्रंथों का अर्थ समझने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय ग्रंथों को मात्र पाठ तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए। बल्कि इसके विषयों को समझकर अपने जीवन में अमल लाने की जरूरत है। इसके साथ ही 18 वर्ष आयु से ही गीता पढ़ने को प्रेरित किया है। वे शुक्रवार को हनुमान पोद्दार के 125वीं जयंती वर्ष पर आयोजित श्रृंखला के तहत लोगों का मार्ग दर्शन कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सतबार का अर्थ है सत्यता है। स्वार्थ को अपने अंदर रखकर हम सौ बार भी पाठ करें, तब भी हनुमान जी प्रसन्न नहीं होंगे। स्वार्थ का त्याग करके पाठ करेंगे तो पहले पाठ से ही खुद को हनुमान जी के करीब पाने लगेंगे। उन्होंने लोगों को बिना वक्त गंवाए गीता पढ़ने को प्रेरित किया ताकि खुद में परिवर्तन के साथ दूसरों का भी मार्ग दर्शन कर सकें। अगर गीता 80 वर्ष की आयु में पढ़ते हैं तो परिवर्तन लाकर भी कुछ नहीं कर सकते हैं। इस मौके पर प्रेम अग्रवाल, अजय अग्रवाल, पुनीत अग्रवाल, विनीत अग्रवाल और उमेश कुमार सिंहानिया आदि मौजूद रहे।