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खतरे में जान डाल कैसे करेंगे इलाज

Fri, 14 Jul 2017 01:31 AM IST
शिवम सिंह
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स्वाईन फ्लू और डेंगू के मरीज सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हाय तौबा मची हुई है। मगर तैयारी के नाम पर स्वास्थ्य अफसर सिर्फ आंखों में धूल ही झोंक रहे हैं। दरअसल, अभी तक जिन कर्मचारियों को डेंगू, स्वाईल फ्लू या संक्रामक रोगों का उपचार करना है उनको टीका ही नहीं लगाया जा सका है। ऐसे में मरीज आने पर अफसरों के दबाव में कितने देर यह वार्ड में ड्यूटी करेंगे इसे आसानी से समझा जा सकता है। हालांकि स्वास्थ्य अफसर शासन को पत्र लिखकर जल्द टीकाकरण कराने का दावा कर रहे हैं।
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बरसात आने के साथ ही संक्रामक रोगों के मरीजों का सामने आना कोई नई बात नहीं है। लेकिन स्वास्थ्य अफसर हर बार इसकी तैयारी को लेकर पीछे ही रहते हैं। बीमारी से मौत होने पर अफसर दूसरे जिले में रहने के दौरान बीमारी होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ देते है। दबाव बढ़ने पर अलग वार्ड और इलाज का दावा किया जाता है लेकिन यह कितना सही है इसका अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि शहर में स्वाईल फ्लू और डेंगू ने दस्तक दे दी है और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को टीका तक नहीं लगाया जा सका है। डॉक्टरों को सुरक्षा किट उपलब्ध करा दी गई है लेकिन कर्मचारी अभी भी मरीज के आने पर खतरे में जान डालकर इलाज करने को मजबूर होंगे।
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कर्मचारियों के वैक्सीनेशन के लिए शासन को पत्र लिखा गया है, जल्द ही वैक्सीन आने के बाद टीकाकरण करा दिया जाएगा।
- डॉ. दिनेश सोनकर, एसआईसी, जिला अस्पताल
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