संतकबीरनगर।स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनाने के लिए लोगों को प्रेरित करने और डॉटा फीडिंग करने के लिए नियुक्त चार ब्लॉकों के खंड प्रेरकों ने गुरुवार को डीपीआरओ को इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे मेें कहा गया है कि निर्धारित मानदेय में कटौती किए जाने की वजह से वह काम करने में असमर्थ हैं और स्वेच्छा से इस्तीफा दे रहे हैं।
नाथनगर ब्लॉक में तैनात खंड प्रेरक रामेश्वर पटेल, बेलकर कला में तैनात मनीष कुमार, सेमरियावां में तैनात अशोक कुमार और पौली में तैनात हीरालाल ने डीपीआरओ को अपना इस्तीफा दिया हैं। चारों खंड प्रेरकों ने कहा कि उनकी तैनाती प्रदाता एजेंसी के जरिए खंड प्रेरक के पद पर हुई थी। प्रति महीने 10000 रुपये मानदेय निर्धारित था, लेकिन दस अगस्त 2015 से प्रदाता एजेंसी के जरिए चार-पांच माह बाद मानदेय दिया जा रहा है,उसमें भी कटौती करके सिर्फ 7500 की दर से दिया जा रहा है। इससे उन लोगों को कार्य करने में बाधा उत्पन्न हो रही है। आरोप है कि पांच जुलाई 2017 की डीएम की समीक्षा बैठक में निर्देश दिया गया है कि सुबह नौ बजे से रात्रि नौ बजे तक उनके कार्यों की समीक्षा की जाएगी। ऐसे में वह लोग 7500 रुपये मानदेय पर काम नहीं कर पाएंगे। वे स्वेच्छा से इस्तीफा दे रहे हैं। डीपीआरओ आलोक कुमार प्रियदर्शी ने बताया कि शासनादेश के मुताबिक डीएम की अध्यक्षता वाली समिति के जरिए प्रदाता एजेंसी का चयन किया जाता है। खंड प्रेरक की नियुक्ति प्रदाता एजेंसी करती है। खंड प्रेरकों का काम शौचालय बनवाले के लिए समुदाय जागरूकता, शौचालयों की जांच और उनकी फोटो एकत्र करने के साथ डाटा फीडिंग का होता है। उन्हें दस हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। शासनादेश के मुताबिक कंपनी या संगठन के जरिए दस से पंद्रह हजार रुपये मानदेय तक के कर्मियों का भविष्य निधि के तौर पर 2500 रुपये की कटौती की जाएगी। वैसे इस मामले को डीएम के संज्ञान में लाएंगे और प्रदाता एजेंसी से भी वार्ता करेंगे।