सिद्धार्थनगर। अपराध नियंत्रण पर योगी सरकार भले ही गंभीरता से काम कर रही हो, मगर अब तक का रिजल्ट उल्टा ही है। वर्ष-2016 की तुलना में जिले में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। हत्या, अपहरण, बलात्कार, चोरी के मामलों में बेतहासा वृद्धि हुई है। पुलिस विभाग के रिकॉर्ड खुद इसकी गवाही कर रहे हैं। हालांकि पुलिस लगातार कोशिश कर रही है। इसके बावजूद अपराध नियंत्रण न होने से व्यवस्था पर सवाल खड़े होना लाजिमी है।
पुलिस विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2016 में मई माह तक जिले में हत्या की तीन घटनाएं हुई थीं, जिनकी संख्या इस बार सात हो गई है। बलात्कार की संख्या 9 से बढ़कर 10 हो गई है। वर्ष -2016 में 35 अपहरण हुए थे, इस बार आंकड़ा 59 तक पहुंच गया है। लूट, वाहन चोरी सहित अन्य तरह की चोरियों में भी इजाफा हुआ है। अपराध का यह तुलनात्मक ब्योरा पुलिस विभाग के रिकॉर्ड का है। इससे इतर तमाम ऐसे मामले भी होंगे, जो केस के रूप में पंजीकृत होने से पहले ही रफा-दफा हो जाते हैं।
अपराध नियंत्रण की हकीकत चाहे जो भी हो, मगर पुलिस का दावा है कि वह गंभीरता से काम कर रही है। इसी का असर है कि इस बार गुंडा एक्ट के तहत अब तक 93 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जो पिछले वर्ष (38) के सापेक्ष दो गुना से भी अधिक है। गैंगेस्टर, आर्म्स एक्ट, आबकारी एक्ट के तहत भी काफी कार्रवाइयां हुई हैं। फरार व नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इस बाबत एएसपी अरविंद कुमार मिश्र का कहना था कि घटनाओं का कोई समय नहीं होता। यह घटती-बढ़ती रहती हैं। पुलिस अपनी कार्रवाई पूरी ईमानदारी और तत्परता से कर रही है। सफलताएं इसी का परिणाम हैं।
अपराध का तुलनात्मक विवरण
अपराध वर्ष 2016 वर्ष 2017
हत्या 03 07
डकैती 04 00
बलात्कार 09 10
अपहरण 35 59
लूट 01 02
चोरी 25 27
अपराध के बढ़ते आंकड़े का यह भी कारण
अपराध के बढ़ते आंकड़े के लिए सरकार की सख्त कार्यप्रणाली को भी कारण बताया जा रहा है। पुलिस सूत्रों की माने तो पहले कई मामले ऐसे होते थे, जिसे पंजीकृत ही नहीं किया जाता था। सिर्फ केस दर्ज कराने के लिए फरियादी को थाने से लेकर पुलिस ऑफिस तक चक्कर लगाना पड़ता था। पुलिस अपने अनुसार गुण-दोष देखकर उसे दर्ज करती थी। अब नई सरकार ने सभी मामलों को तत्काल पंजीकृत करने के निर्देश दिए हैं। थाने पर पहुंचने के बाद पुलिस पहले केस दर्ज करेगी, उसके बाद जांच करेगी।