गुमशुदगी की रपट दर्ज करने के बाद सुस्त रहने वाली पुलिस एक महीने में 1095 बच्चों को खोज निकाला। दरअसल, आईजी मोहित अग्रवाल ने गायब बच्चों के मामले को गंभीरता से लेते हुए जोन के पुलिस को खोज निकालने का आदेश दिया था, जिस पर पुलिस ने सक्रियता दिखाई और बड़ी संख्या में बच्चे अपने घर पहुंच सके। आईजी ने बच्चों को खोज निकालने वाली टीम को पांच-पांच हजार रुपये ईनाम देने की घोषणा की।
मालूम हो कि आईजी ने जून के अंत में सभी जिलों को निर्देश जारी किया था कि गायब बच्चों को खोज निकालने के लिए जिला स्तर पर मानीटरिंग टीम गठित करने और थानेवार कम से एक दरोगा की अगुवाई में सिपाहियों की टीम गठित करने का आदेश दिया था। टीम को गायब या अपहृत बच्चों की सूची तैयार करने और अलग-अलग कैंप लगाकर बच्चों के परिजनों से इनपुट लेने व उसी आधार पर काम करने को कहा था। इसका असर हुआ और एक साथ 1095 गायब बच्चे मिल गए। इस अभियान का फायदा यह हुआ कि देवरिया से गायब कुछ बच्चे बहराइच और गोरखपुर से गायब कुछ बच्चे बलरामपुर, गोंडा आदि जिलों से मिल गए।
घर को लौटे बच्चे
गुमशुदा 13 बच्चे, 23 बच्चियां
अपहृत 15 बच्चे, 45 बच्चियां
दुकानों पर काम करते, सार्वजनिक स्थलों पर घूमते और तस्करी के लिए ले जाए
जा रहे 953 बच्चे और 46 बच्चियां।