गोरखपुर। गर्भावस्था के दौरान वजन अधिक है तो मधुमेह होने का खतरा बना रहता है। डॉक्टर के परामर्श पर डायबिटीज की जांच अवश्य कराएं। पुष्टि होने पर इंसुलिन लगवाने से न परहेज करें। डायबिटीज की इलाज न होने से माता के साथ ही गर्भ में पल रहे बच्चे को भी खतरा हो सकता है। ये बातें गोरखपुर ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलाजिकल सोसाइटी के तत्वाधान में एक होटल में गर्भावस्था के मधुमेह के कारण विषय पर आयोजित वर्कशॉप में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजकिशोर सिंह ने कहीं।
कहा कि थोड़ी सी लापरवाही से बच्चे को जन्मजाम विकृति, दिल की बीमारी, वजन ज्यादा होना और यहां तक कि मौत का भी खतरा हो सकता है। वर्कशॉप की अध्यक्षता डॉ. राधा जीना ने की। इसे डॉ. रीना श्रीवास्तव और डॉ दीप्ति चतुर्वेदी ने भी संबोधित किया। इस दौरान डॉ. मधु गुलाटी, डॉ. साधना गुप्ता, डॉ. किरन श्रीवास्तव आदि मौजूद रहीं।
अध्यक्ष बनी डॉ मधुबाला
गोरखपुर आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट सोसाइटी की नई अध्यक्ष डॉ. मधुबाला बनीं हैं। उन्होंने डॉ. सुरहिता करीम की जगह अध्यक्ष का पद ग्रहण किया। सचिव डॉ. मीनाक्षी गुप्ता ने डॉ. बबीता शुक्ला का स्थान लिया है। वहीं डॉ. सूफिया अब्बासी कोषाध्यक्ष बनी हैं।