किराए के भवन में चल रहा नगर पंचायत कार्यालय
दफ्तर के लिए उपलब्ध नहीं हो पाई जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
गौर। वर्ष 2002 में बभनान को नगर पंचायत का दर्जा तो मिला, मगर डेढ़ दशक के बाद भी अब तक नगर पंचायत को खुद का भवन नसीब नहीं हो पाया है। ऐसे में नगर पंचायत का कामकाज किराए के भवन में कार्यालय खोलकर किया जा रहा है।
नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बाद बभनान के लोगों को उम्मीद थी कि अब शहर जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इस बीच डेढ़ दशक बीत गए और अब तक कार्यालय के लिए नगर पंचायत को अपना भवन तक नहीं मिल पाया है। ग्यारह वार्डों में विकास कार्य कराने के लिए रूपरेखा तैयार करने वाले नगर पंचायत कार्यालय किराए के भवन में चल रहा है। यहां न तो कार्यालय जैसी कोई व्यवस्था है और न ही सदस्यों के बैठने की सुविधाएं। एक कमरे में अधिशासी अधिकारी का कार्यालय है। फरियादियों से लगायत सम्मानित लोगों तक को खड़े होकर अपनी बात कहनी पड़ती है। क्योंकि कार्यालय में समुचित व्यवस्था न होने से कोई बैठने को नहीं कह पाता। नगर पंचायत क्षेत्र में रहने वालों की आबादी करीब 18 हजार है, लेकिन सुविधाएं न के बराबर हैं। कहीं भी सुलभ शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया है। वर्ष 2002 से सरकारी पशु अस्पताल में कार्यालय खोला गया। उसके बाद 2008-09 से किराए के भवन में कार्यालय संचालित हो रहा है। किराया प्रतिमाह तीन हजार रुपये निर्धारित था, लेकिन जनवरी 2019 से पांच हजार प्रतिमाह किराया कर दिया गया। ऐसे में नगर पंचायत प्रशासन किराए के तौर पर अब तक कई लाख रुपये भुगतान कर चुका है। नगर पंचायत के पहले चेयरमैन श्रीप्रकाश गुप्ता ने बताया कि कार्यालय के लिए लोहिया नगर में 14 बीघा चिह्नित की गई थी। यह भूमि कुछ लोगों के कब्जे में थी। अपने कार्यकाल के दौरान जमीन के लिए मुकदमा में मजबूती से पैरवी भी कराई लेकिन कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया।