महोत्सव में शिरकत करने आईं शरदा सिन्हा ने अपराजिता मुहिम का पोस्टर रिलीज किया।
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गोरखपुर। गोरखपुर महोत्सव में शनिवार की शाम पद्मभूषण शारदा सिन्हा के झूमर से झूम उठी। ‘पनिया के जहाज...’ के जरिए उन्होंने भोजपुरी सुरों के सागर में श्रोताओं को नहला दिया। ‘पटना से वैदा बुलाई दा...’ गाकर शारदा सिन्हा ने श्रोताओं को मगन कर दिया। शारदा के सुरीले सफर में ‘अमवा महुअवा के झूमे डलिया...’ गीत पर लोग प्रकृति से जुड़कर खुद भी झूमने लगे। ‘का लेके शिव के मनाइब हो शिव मानत नाहीं...’ गाकर शारदा सिन्हा ने सबको भक्ति सरिता में गोते लगवा दिए।
इससे पहले कुशीनगर के रहने वाले लोक गायक सुरेश कुशवाहा ने ‘कौने रहिया आवे माई के रथिया...’ देवी गीत से शुरुआत की। ‘आंगनिया में बबूरा लगइबअ त कइसे के आम हो जाइ...’ से सुरेश कुशवाहा ने लोगों को सार्थक संदेश दिया। ‘पांव में पयलिया सोहे हाथ में कंगनवा...’ गाया तो लोग झूम उठे। ‘गोरखपुर में घर बा त कौने बात के डर बा...’ सुनाकर सुरेश ने गोरखपुरवासियों में जोश भर दिया। बालेश्वर यादव का गीत ‘दुनियावाले हमके कहेला बिहारी मितवा...’ सुनाकर उन्होंने मुंबई में रहने वाले पूर्वांचलवासियों की पीड़ा बयां की। उनके साथ गायिका जया ने ‘हम कोइलरिया न जाइब हे ललमुनिया के माई...’ युगल गीत सुनाकर लोगों को झूमा दिया। वाद्य यंत्रों पर संगत रवि कुमार, लालधर वर्मा, सूरज कुमार और शहनवाज हुसैन ने दी।
बेटी सोहर ने किया लोगों को भावुक
अयोध्या की संजोली पांडेय ने ‘बाबा गोरखनाथ के दरस करा द...’ सुनाकर गोरखनाथ की धरती को नमन किया। उन्होंने ‘पढ़िया लिखिया कौनो भाषा बतियइहा भोजपुरी में...’ गाकर भोजपुरी के संरक्षण की अलख जगाई। ‘पिया मेहंदी लेया द मोती झील से...’ कजरी सुनाकर संजोली लोगों को प्रेम रस से सराबोर कर दिया। ‘काटीं सोना और चनिया चला ए मोर धनिया...’ कटनी गीत से उन्होंने लोगों को गांव की माटी से जोड़ दिया। बेटी सोहर पर उनके साथ ‘धरोहर ग्रुप’ के कलाकारों ने भाव नृत्य पेश करके बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की अलख जगाकर लोगों को भावविभोर कर दिया। ‘बड़ा नीक लागे इंडिया...’, ‘सजन राजधानी पकड़ के आ जइयो...’ आदि गीतों से उन्होंने लोगों का खूब मनोरंजन किया। वाद्य यंत्रों पर संगत सचिन कुमार, अमित कुमार, राहुल, मुकेश मधुकर, कमाल आदि ने दी।
संजू के गीतों से सजी शाम की महफिल
शाम छह बजे के करीब मंच पर उतरी संजू सिंह ने अपने गीतों से महफिल सजा दी। शुरुआत ‘कीन द बाबा बनारसी सड़िया...’ सुनाकर की। ‘सांझे बोले चिरई सबेरे बोले मोरवा...’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। ‘पिया गईलें कलकतवा रे सजनी...’ धोबिया गीत सुनाकर संजू ने विरहणी की पीड़ा बयां की। ‘पीपरा के पतवा पुलइयां डोले रे ननदी...’ झूमर से उन्होंने लोगों को झूमाया तो इसके बाद लोकगीत ‘राते बलमुआ दिहले गारी हो तरकारी के बिना ना...’ सुनाया।
स्थानीय कलाकारों ने भी दी प्रस्तुति
लोकरंग का कार्यक्रम तीन बजे शुरू हुआ। शुरुआत में स्थानीय लोगों की प्रस्तुतियां हुईं। इंदू गुप्ता ने पूरबी, सावनी आदि विधाओं का जादू चलाया। बृजकिशोर त्रिपाठी गुलाब ने ‘खेलत रहलीं धूरी माटी माई बान्हें गांती...’ सुनाकर भोजपुरी के प्रसिद्ध कवि त्रिलोकीनाथ पांडेय को याद किया। विजय पांडेय ने ‘ओढ़नी के रंग पीयर...’ सुनाया। भोजपुरी की सुप्रसिद्ध गायिका मैनावती देवी की स्मृति में उनकी पोतियां ऐश्वर्या ने ‘बहे बसंती बयार...’ और अमृता ने ‘कई सावन बरस गए...’ लोकगीत सुनाए।