गोरखपुर। पूज्य श्री श्री झूलेलाल का 67वां वार्षिक महोत्सव शनिवार को महानगर में धूमधाम से मनाया गया। सड़कों पर सिंधी समाज के लोगों का उत्साह देखने लायक था। झूलेलाल की भव्य शोभायात्रा में झांकियां सभी के आकर्षण का केंद्र रहीं। शोभायात्रा का शुभारंभ शाम चार बजे गोरखनाथ स्थित झूलेलाल मंदिर से किया गया।समाज के लोगों ने आरपीएफ के मुख्य सुरक्षा आयुक्त राजाराम भागवानी को अंगवस्त्र भेंट किया। उन्होंने सभी को महोत्सव की बधाई दी। विशिष्ठ अतिथि धनबाद के जिला जज राजेंद्र भागवानी रहे। शोभा यात्रा तरंग क्रासिंग, कैलाश नगर, जटाशंकर, आर्य नगर, बक्शीपुर, अग्रसेन चौक, विजय चौक होते हुए देर रात गोलघर पहुंच कर समाप्त हुई।
शोभायात्रा में शामिल झांकियों में हर बार की तरह कई ज्वलंत मुद्दों को दर्शाया गया। इनमें अटल की अस्थि कलश यात्रा, देश के शहीद जवानों, सड़क सुरक्षा पर आधारित ‘प्लीज सेव अ लाइफ’ सिंधी भाषा को प्रोत्साहित करने वाली ‘हिंदी मेरी मां, सिंधी मेरी मौसी’ समेत अन्य झांकियां प्रमुख रहीं। सिंध सेवक समाज पूज्य पंचायत आर्य नगर की तरफ से बनाई झांकी ऑपरेशन ऑल आउट सभी के आकर्षण का केंद्र रही। सीएम योगी आदित्यनाथ पर आधारित झांकी ने लोगों का विशेष ध्यानाकर्षण किया। इस दौरान अशफाक हुसैन मेकरानी, अरशद जमाल सामानी, ओम प्रकाश आर्य, हरीश साधवानी, हीरा केशवानी, शिवम अग्रहरि, सिराज हुसैन, हरीश रामानी, आनंद, मनोज, कन्हैया, नानक चंद, विक्की केशवानी, फैसल जमाल, मोइनउल्लाह अंसारी, मुकुल कारवानी, इशू लखमानी, माधाव दास समेत सिंधी समाज के लोग मौजूद रहे।
जगह-जगह हुआ स्वागत
शोभायात्रा का लोगों ने जगह-जगह स्वागत किया। युवा सिंधी समाज के अध्यक्ष कमल मंझानी व महामंत्री देवा केशवानी समेत सिंधी समाज के सैकड़ों लोगों की सहभागिता रही। बिस्कुट मर्चेंट एसोसिएशन ने एडी राजकीय कन्या इंटर कॉलेज के सामने शोभायात्रा का स्वागत किया। झांकियों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय व सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया।
नाचते गाते निकली झांकियां
ढोल, नगाड़े, शहनाई, बैंडबाजों की धुन पर नाचते उत्साही युवक झूलेलाल का जयकारा लगाते शोभायात्रा में शामिल हुए। सबसे आगे झूलेलाल का प्रतीक वाहन था। उनके पीछे गोरखनाथ, जटाशंकर कल्याण नगर, आर्यनगर व विकास नगर में स्थापित झूलेलाल की प्रतिमाएं थीं। महिलाओं ने भी शोभायात्रा में बढ़चढ़ कर भाग लिया। अंत में झूलेलाल जी की प्रतिमाओं को बर्डघाट पर राप्ती नदी में विसर्जित किया गया।