संतकबीरनगर। सांथा ब्लॉक में मनरेगा के अंतर्गत उजागर हुए 32 लाख के घोटाले में पूर्व ब्लॉक प्रमुख, तत्कालीन बीडीओ समेत पांच लोगों पर डीएम ने एफआईआर और वसूली का निर्देश सीडीओ को दिया गया है। इससे डीआरडीए से लेकर ब्लॉक मुख्यालय तक हड़कंप मच गया है। दरअसल, पूर्व सांसद भालचंद यादव ने 26 नवंबर 2013 को प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास को पत्र लिखकर सांथा ब्लॉक की 33 परियोजनाओं में मजदूरों को मजदूूरी भुगतान न किए जाने की शिकायत की थी। इस पर पूर्व डीएम ने 25 जनवरी 2014 को पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की। जांच में 32,12,185 रुपये का घपला उजागर हुआ था। जांच टीम को वसूली एवं वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति, कार्यादेश माप पुस्तिका एवं आंगणन में कई जगह ओवर राईटिंग एवं फ्लूड लगा मिला। कई पत्रावलियों के पृष्ट संख्याओं के अंकन में कट कर संशोधन किया गया था। कई परियोजनाओं का प्राक्कलन भी उपलब्ध नहीं था। बाद में पूूर्व सांसद ने पांच सदस्यीय कमेटी की जांच रिपोर्ट पर आरोप लगाते हुए जांच अन्य अधिकारियों से कराने की मांग तत्कालीन डीएम से की। उसके बाद पूर्व डीएम ने एक्सईएन लोक निर्माण विभाग, एक्सईएन ड्रेनेज खंड एवं उप निदेशक कृषि प्रसार की संयुक्त कमेटी बना कर जांच सौंप दी। चार सितंबर 2014 को दूसरी कमेटी ने भी जांच की तो पहले कमेटी की जांच रिपोर्ट को सही ठहराया गया था।
इसके बाद से अब तक कार्रवाई अटकी हुई थी। डीएम मार्कंडेय शाही ने बताया कि पत्रावली का परीक्षण किया गया। उस दौरान मनरेगा के अंतर्गत धनराशि के आहरण हेतु कराए गए कार्यों का भुुगतान बीडीओ और प्रमुख के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जा रहा था। 33 परियोजनाओं की हुई अलग-अलग टीमों के जरिए दो दफा हुई जांच में 16 परियोजनाओं में 32.12 लाख का घपला पाया गया है।
कार्य प्रभारी दिवंगत विनय कुमार पांडेय से 480847 रुपये, ग्राम पंचायत अधिकारी अमर कुमार से 17681 रुपये, ग्राम विकास अधिकारी कौशल कुमार सिंह से 5,72,093 रुपये, ग्रामीण अभियंत्रण के अवर अभियंता दिवंगत गंगा प्रसाद श्रीवास्तव से 10,52,940 रुपये, अवर अभियंता आरईडी रामअचल से 17,681 रुपये, पूर्व बीडीओ बी के मोहन से 535311 रुपये, पूर्व प्रमुख सहरुन्निशा से 5,35,311 रुपये की वसूली की जानी है। चूंकि विनय कुमार पांडेय एवं गंगा प्रसाद श्रीवास्तव की मृत्यु जांच से पूर्व हो गई है। ऐसे में तत्कालीन बीडीओ और पूर्व प्रमुख समेत पांच लोगों से वसूली कराए जाने का निर्देश सीडीओ को दिया गया है। इसके साथ ही विभागीय कार्रवाई और एफआईआर दर्ज कराए जाने का भी निर्देश दिया है।
सातवें डीएम ने की कार्रवाई
सांथा में उजागर हुए 32 लाख के मनरेगा घोटाले की जांच के बाद जिले में छह डीएम आए और चले गए। पर, कार्रवाई नहीं हो पायी। पूर्व डीएम इंद्रवीर सिंह यादव के समय मामला उठा और जांच हुई। इसके बाद भरतलाल राय, प्रकाश बिंदु, अजयदीप सिंह, डॉक्टर सरोज कुमार, आरके पांडेय जिले में बतौर डीएम आए। सूत्रों के अनुसार, ऊंचे रसूख के चलते मामला पेंडिंग में था। कार्रवाई की जद में आए पूर्व बीडीओ बीके मोहन की वर्तमान में लखीमपुर खीरी में तैनात हैं और पूर्व डीजी प्रशिक्षण रहे बाबूलाल यादव के भाई भी हैं। वर्तमान डीएम मार्कंडेय शाही ने मामले का संज्ञान लिया और विलंब से ही सही इसमें कार्रवाई का निर्देश जारी कर दिया।