गोंडा। आपदा से बचाव के लिए स्वयं सहायता समूहों की प्रमुखों के लिए आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण जिला पंचायत सभागार में हुआ। मंडलीय कार्यशाला में चारों जिलों से 300 समूहों की अध्यक्ष शामिल हुईं।
आयुक्त शशिभूषण लाल सुशील ने शुभारंभ किया। कहा कि आपदा के समय महिलाओं की भूमिका काफी अहम है। आपदा प्रबंधन में महिलाओं की सहभागिता के दूरगामी परिणाम होंगे। विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, अग्निकांड, सर्पदंश, आकाशीय बिजली, ग्लोबल वार्मिंग, सुनामी के अलावा मानव जनित आपदाओं से कैसे बचाव करना है, इसके लिए समुदाय का प्रशिक्षित होना आवश्यक है।
जिला मजिस्ट्रेट नेहा शर्मा ने कहा कि किसी भी आपदा के दौरान गोल्डन आवर और आपदा के दौरान क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी होना सबसे महत्वपूर्ण होता है। कहा कि तमाम आपदाएं ऐसी हैं जहां पर महिलाएं सबसे पहले प्रभावित होती हैं लेकिन जानकारी के अभाव में वे सहायता करने के बजाय घबरा जाती हैं। इसलिए समुदाय आधारित महिलाओं का आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक होना और प्रशिक्षित होना नितांत जरूरी है।
मुख्य विकास अधिकारी अंकिता जैन ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। अब आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। सीएमओ डाॅ. रश्मि वर्मा ने कहा कि विभिन्न आपदाओं जैसे शीत लहर, लू, बाढ़, सर्पदंश आदि के दौरान हमें व्यक्ति को बचाने के लिए तुरंत क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी हर व्यक्ति को होनी चाहिए। कार्यशाला में अपर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार रावत व पीडी डीआरडीए चंद्रशेखर ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
एसडीआरएफ टीम, अग्निशमन टीम, स्वास्थ्य विभाग की टीम तथा गोण्डा, बलरामपुर, बहराइच व श्रावस्ती के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने जनपदों की संभावित आपदाओं एवं उससे बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से प्रशिक्षण दिया। आपदा प्रबंधन विभाग, अरगा ब्रांड व एसडीआरएफ द्वारा लगाए गये स्टाल का अवलोकन किया। कार्यक्रम का संचालन आपदा प्रबंधन अधिकारी श्रावस्ती अरुण मिश्र ने किया। इस दौरान प्रभारी नगर मजिस्ट्रेट राजीव मोहन सक्सेना, एसडीएम सदर अवनीश त्रिपाठी, आपदा प्रबंधन अधिकारी राजेश श्रीवास्तव, बलरामपुर अरुण सिंह, बहराइच सुनील कनौजिया आदि रहे।