इस बार मौसम के मिजाज से किसान परेशान हैं। बारिश के सीजन में जहां सावन का महीना किसानों को दगा दे गया है, वहीं अब भादों का माह भी रंग दिखाने लगा है। दो माह में दो-तीन दिन हुई बारिश के अलावा बाकी दिन कड़ी धूप व गर्मी के साथ गुजरे हैं। किसानों का मानना है कि फसलों के इस समय विकास का वक्त है। बारिश न होना फसलों के लिए खतरनाक है। ऐसे में फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
इस समय फसलों के विकास का वक्त है। किसानों के खेत में पानी नहीं है। वैसे तो खरीफ की सभी फसलों को पानी की जरूरत है। खासकर, धान की फसलों को पानी की जरूरत है। किसानों का कहना है कि धान के खेत में इस समय पानी भरा होना चाहिए लेकिन आसमान से तेज धूप बरस रही है। पूरा सावन बीत गया दो दिन ही पानी गिरा है। इस बार न सावन में बारिश की फुहार दिखी न ही मूसलाधार बारिश हुई। इस तरह के हालात से किसान चिंतित हैं।
जिले में फसलों का एरिया
फसल हेक्टेयर
धान - 141219
अरहर - 3372
मक्का - 899
मेंथा - 12
उरद - 63
तिल आदि 324
इनसेट
...ऐसे तो डूब जाएगी लागत
बारिश न होने को लेकर किसानों के होश उड़े हुए हैं। अपनी गाढ़ी कमाई को खरीफ फसलों में लगा देने के बाद अब बारिश न होने से अपनी फसलों को सूखते देख हलकान हैं। ग्राम भदुआतरहर के प्रगतिशील किसान शत्रोहन यादव ने बताया कि उनका करीब 20 बीघा धान पानी कमी से कुम्लहा रहा है।
बारिश न होने से पंपिंगसेट से पानी भरकर धान की रोपाई करवाई थी। काफी पूजीं लगी है, वो अब खतरे में पड़ी दिखाई दे रही है। किसान सुरेश तिवारी को कहना है कि बारिश न होने से पंप के जरिये फसलों को बच पाना आसान नहीं है। खेत की जमीन सूख चुकी है। ऊपर से रोज आग बरसाती धूप नमी सोख ले रही है।
किसान तुलसीराम का कहना है कि बारिश न होने से इस बार किसानों की लागत डूबने खतरा है। किसान राम कुमार का कहना है कि इतना महंगा डीजल तेल लाकर किसान आखिर अपने खेत की कितनी बार सिंचाई कर पाएंगे।
इस बार जिले में औसत से भी काफी कम बारिश होने से खरीफ की फसलों का अच्छा विकास नहीं हो पा रहा है। एक तो देर से बारिश शुरू हुई, दूसरे इसका शुरुआती दौर भी अच्छा न रहने से खेती प्रभावित हो रही है। अब जब फसलों के विकास का समय है तो बारिश नहीं हो रही है।