जिला अस्पताल में लगी सीटी स्कैन मशीन 9 की लकड़ी और 90 खर्च वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है। इस मशीन की खासियत यह है कि यह बगैर जनरेटर के नहीं चल पाती। जब से यह मशीन यहां लगी है, तब से लेकर आज तक लाखों रुपये का डीजल इस मशीन को चलाने में फुंक चुका है।
वह भी तब जबकि जिला अस्पताल को 24 घंटे बिजली दिए जाने के लिए इसकी एक अलग लाइन भी है। लेकिन फिर भी मशीन है कि बिजली से चलाने पर चलती ही नहीं और बार-बार वोल्टेज ड्राप करके बैठ जाती है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आशुतोष गुप्ता के पूरे मामले की शिकायत आयुक्त से किए जाने के बाद बुधवार को पूरे दिन पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारी सीएमएस के साथ मिलकर इसके कारणों का पता करने की जुगत में जुटे रहे। लेकिन देरशाम तक उन्हें सीटी स्कैन मशीन के बार-बार बिजली की लाइन का वोल्टेज ड्राप किए जाने का कोई मुकम्मल कारण नहीं पता चल पाया।
हालांकि पावर कॉर्पोरेशन के एसडीओ प्रथम हर्ष रस्तोगी यह कहना जरूर है कि सीटी स्कैन मशीन की लाइन एक ऐसे बिजली के खंभे से जुड़ी है, जो काफी पीछे लगा है। जिसके लिए एक नई लाइन से मशीन को सबसे आगे वाले खंभे से जोड़कर चलाए जाने की तैयारी वह कर रहे हैं, अगर इसमें वह सफल रहते हैं तो सीटी स्कैन मशीन की लाइन को उसी खंभे से जुड़वा दिया जाएगा।
हैरत की बात है कि जिला अस्पताल में जब से सीटी स्कैन मशीन लगी है, तब से उसका संचालन अस्पताल में लगे 125 केवीए क्षमता के ही जनरेटर से होता आ रहा है। यह जनरेटर एक घंटे में 30 से 35 लीटर डीजल खाता है।
ऐसे में केवल काम के दिनों में तीन घंटे सीटी स्कैन मशीन चलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को इस पर रोजाना हजारों रुपये का डीजल खर्च करना पड़ता है। वह भी उस बिजली के होते हुए, जिस पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से करोड़ों रुपये खर्च करके हॉस्पिटल फीडर के नाम से एक 33 केवी लाइन के स्वतंत्र फीडर का निर्माण करवाया गया है।
सीएमएस डॉ. आशुतोष गुप्त की आयुक्त से की गई शिकायत पर बुधवार को पूरे दिन पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारी सीटी स्कैन मशीन के बार-बार वोल्टेज ड्राप किए जाने के कारणों की पड़ताल में जुटे रहे।
सीएमएस डॉ. आशुतोष गुप्त ने बताया कि सीटी स्कैन मशीन के मैकेनिक ने मशीन में किसी तरह की कोई खराबी न होने की बात उन्हें लिखकर दी है। इसलिए बुधवार को पावर कॉर्पोरेशन के लोगों को बुलाकर इसका कारण पता किया जा रहा है।