बालपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोई डॉक्टर नहीं है। इस कारण यहां आने वाले मरीजों का इलाज फार्मासिस्ट को ही करना पड़ता है। शनिवार को फार्मासिस्ट भी अस्पताल नहीं आए। जबकि फार्मासिस्ट को दिखाने आए 58 मरीजों से बिना इलाज के ही एक रुपये पर्चे के हिसाब से 58 रुपये ले लिए गए। दोपहर तक फार्मासिस्ट के अस्पताल आने का इंतजार करने के बाद भी जब वह नहीं आए तो मायूस होकर मरीजों को लौटना पड़ा। इस दौरान मरीजों ने पीएचसी की बदहाल व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन भी किया।
एक तरफ जहां प्रदेश सरकार सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था चाक-चौबंद करने में जुटी है, तो वहीं उन अस्पतालों में काम करने वाले सरकारी मातहत उसकी लुटिया डुबोने में। शनिवार को पीएचसी बालपुर में बिना डॉक्टर फार्मासिस्ट से इलाज कराने आए 58 मरीजों को उस वक्त मायूसी झेलनी पड़ी।
जब बने बनाए पर्चे पर उन्हें इलाज की सुविधा नहीं मिली और उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। परसागोड़री के रहने वाले बृजकिशोर शनिवार को सीने में दर्द होने पर अस्पताल आए थे। जहां उन्होंने वार्ड बॉय से एक पर्चा बनवाया। इसी तरह सोनहरा के आशाराम बुखार की दवा लेने अस्पताल पहुंचे थे।
जबकि बंजरिया निवासी शेर मोहम्मद पैर के इलाज, विष्णु मौर्या बुखार सहित कुल 58 मरीज अस्पताल आए थे। जिन्होंने नियमानुसार अस्पताल से बनने वाला एक रुपये का पर्चा बनवाया और अस्पताल में ही फार्मासिस्ट अनिल कुमार का इंतजार करने के लिए बैठ गए। लेकिन दोपहर के दो बजे तक फार्मासिस्ट अस्पताल नहीं आए, जिसके बाद नाराज मरीजों ने अस्पताल में प्रदर्शन किया।
लोगों का कहना था कि आए दिन अस्पताल से फार्मासिस्ट गायब रहते हैं। जबकि सीएमओ स्तर से अस्पताल में किसी डॉक्टर की भी पोस्टिंग नहीं की गई है। इससे उन्हें रोज दिक्कतों से जूझना पड़ता है। वहीं, सीएमओ डॉ. अमर सिंह कुशवाहा का कहना है कि डॉक्टरों की कमी के चलते वहां स्थाई पोस्टिंग में दिक्कतें आ रही हैं। लेकिन जल्द ही इसकी व्यवस्था की जाएगी। रही बात फार्मासिस्ट के अस्पताल न आने की तो इसे भी दिखवाया जाएगा।