गोंडा। जिले में गेहूं की सरकारी खरीद रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। करीब एक माह बाद भी किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने से जी चुराते नजर आ रहे हैं। इसके चलते ही मंडी में आढ़तियों के चबूतरे तो गुलजार दिख रहे हैं जबकि गेहूं खरीद के सरकारी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है। गेहूं की सरकारी खरीद से किसानों का मोहभंग होने का कारण धान खरीद के भुगतान की अटकी 4.98 करोड़ की धनराशि को माना जा रहा है। धान बिक्री का बकाया भुगतान पाने के लिए किसानों को सरकारी विभागों के चक्कर काटने की परेशानी उठानी पड़ रही है। इसी कारण सहालग के मौसम में सरकारी खरीद में भुगतान अटक जाने की आशंका किसानों को आढ़तियों के पास पहुंचा रही है।
जिले में सरकारी दर पर किसानों का धान खरीदने के लिए 98 क्रय केंद्र खोले गए थे। छह क्रय एजेंसियों को 82,300 मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य दिया गया था, जिसके सापेक्ष सात मार्च तक एजेंसियों ने 97,811 मीट्रिक टन धान की खरीद कर डाली। लेकिन इसमें 91 किसानों का 4.98 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो सका। पैसे के लिए किसान अधिकारियों तथा बैंकों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं निकल रहा है। विभागीय अधिकारी किसानों के बैंक खाते का केवाईसी न होने से भुगतान फंसने की बात कह रहे हैं।
भुगतान में डिफाल्टर एजेंसी ही खरीद रही गेहूं
जिन क्रय एजेंसियों ने धान खरीद के समय किसानों के भुगतान में दिलचस्पी नहीं दिखाई, उन्हीं को विपणन विभाग ने अब गेहूं की सरकारी खरीद का जिम्मा भी सौंप दिया है। इसे लेकर किसानों में गहरा रोष है। जिले में धान खरीद के लिए छह एजेंसियां नामित की गई थीं, जिसमें खाद्य विभाग, पीसीएफ, पीसीयू, यूपीएसएस, कृषि उत्पादन मंडी समिति तथा भारतीय खाद्य निगम थे। इनमें से खाद्य विभाग व भारतीय खाद्य निगम को छोड़कर सभी एजेंसियों की बकाएदारी है। विभागीय मिलीभगत के चलते इन एजेंसियों को बैन न कर अब इन्हें ही गेहूं खरीद की जिम्मेदारी भी दे दी गई। इससे एक बार फिर किसानों में भुगतान को लेकर निराशा है। क्रय एजेंसियों ने प्रभारियों की लापरवाही के कारण ही धान बिक्री का 4.98 करोड़ का बकाया भुगतान अब तक 91 किसानों के खाते में नहीं पहुंचा है।
आढ़तियों का चबूतरा गुलजार, सरकारी केंद्रों पर सन्नाटा
विगत वर्ष व धान खरीद में क्रय एजेंसियों के मनमानी का शिकार हुए किसान इस बार सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचने से कतरा रहे हैं। मंडी में आढ़तियों के चबूतरों पर ट्रकों व ट्रॉलियों से गेहूं उतारकर बेचा जा रहा है लेकिन समीप में ही बने सरकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा दिखता है। खरीद कार्य शुरू न होने के कारण केंद्र प्रभारी व अन्य कर्मचारी भी गायब दिखते हैं। ऐसे में गेहूं खरीद के तय लक्ष्य 98 हजार मीट्रिक टन को पूरा करना बड़ी चुनौती दिख रहा है।
धान खरीद का बकाया भुगतान
क्रय ऐजेंसी बकाया भुगतान
खाद्य विभाग शून्य
पीसीएफ 73.66 लाख रुपये
पीसीयू 337.51 लाख रुपये
यूपीएसएस 62.15 लाख रुपये
कृषि उत्पादन मंडी समिति 24.75 लाख रुपये
भारतीय खाद्य निगम शून्य
बैंक खाते की केवाईसी कराएं किसान
किसानों का भुगतान उनके खाते में आधार कार्ड का लिंकअप न होने के कारण अटका है। बैंक स्तर पर किया गया भुगतान कई बार वापस हो चुका है। लगातार अपील के बाद भी चिह्नित किसान अपने बैंक खाते का केवाईसी नहीं करवा रहे। अब बैंक प्रबंधक से मिलकर उनके खाते को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) पर मैप करवाया जा रहा है।
प्रज्ञा मिश्रा, डिप्टी आरएमओ