नगर में शुक्रवार की रात से शनिवार सुबह 11 घंटे तक हुई लगातार मूसलधार बारिश ने नगर पालिका परिषद के उन अधिकारियों की पोल खोलकर रख दी, जो कल तक करोड़ों रुपये से बनवाए गए नालों व नालियों से गंदे पानी की निकासी की दुहाई दिया करते थे। लेकिन जब बारिश हुई तो उनकी सारी कवायदें धरी की धरी रह गईं और नतीजा यह हुआ कि कई सड़कें तालाब और मोहल्ले टॉपू बन गए। किसी के घर में बरसात का पानी तो कहीं नालों का गंदा पानी लोगों के घरों में भर गया।
बरसात होने से गोंडा-लखनऊ रोड पोर्टरगंज से जयनारायण चौराहे, उतरौला, बहराइच सहित बड़गांव ओवरब्रिज की तमाम सड़कें पानी में डूब गईं, जिससे लोगों को पूरे दिन आवागमन में दिक्कतें हुईं। वहीं, जिला अस्पताल के जनरेटर रूम में घुटनों से ज्यादा पानी भर जाने के कारण पूरे अस्पताल की बिजली भी घंटों गुल रही। जबकि मूसलधार बारिश से आधे शहर की बिजली आपूर्ति भी 12 घंटे से ज्यादा समय तक बाधित रही।
शुक्रवार की रात 11 बजे से शुरू हुई मूसलधार बारिश से नगर पालिका के सभी 27 मोहल्ले महज 11 घंटें में ही टॉपू बन गए। फिर चाहे वह शहर की पॉश कॉलोनी आवास विकास हो या सिविल लाइन। हर जगह बारिश का गंदा पानी नाली के रास्ते आगे न जा पाने के कारण लोगों के घरों में घुस गया।
जबकि कमोवेश इसी तरह का हाल नगर पालिका के साहबगंज, पंतनगर, बलवंतपुरवा, सिविल लाइन प्रथम, राजा मोहल्ला, पटेलनगर प्रथम, पटेल नगर द्वितीय, शास्त्री नगर, सिविल लाइन द्वितीय, बड़गांव, छेदीपुरवा, मकार्थीगंज, इमामबाड़ा, सुभाषनगर, रानीबाजार, सिविल लाइन तृतीय, महराजगंज, आवास विकास प्रथम, महरानीगंज, आवास विकास द्वितीय, मालवीयनगर, राधाकुंड, जिगरगंज, मेवातियान, दयानंद नगर, अहिरान, राजेंद्र नगर सहित सभी 27 मोहल्लों का भी रहा, जहां लोगों को जलभराव की दुश्वारियां झेलनी पड़ीं।
शनिवार को रामलीला मैदान के निकट मालवीयनगर में एक लाइन से बने तमाम मकानों में बारिश का पानी घुस गया। लोग जब सुबह सोकर उठे तो उन्हें घर की अन्य वस्तुएं पानी में तैरती मिलीं। वहीं खैरा, बड़गांव व सेमरा रेलवे कॉलोनी में बने रेलकर्मियों के आवासों में भी बारिश का पानी घुस गया।
जबकि वी-मार्ट के नीचे बनी तमाम दुकानों में भी जलकल कॉलोनी के पीछे से होकर जाने वाले नाले का पानी ओवरफ्लो होकर घुस गया। जिसे निकालने के लिए दुकानदारों को पंपिंग सेट लगवाना पड़ा। वहीं फैजाबाद रोड पर मुन्नन खां चौराहे के ठीक सामने एक लाइन से बने दोनों ओर बने मकानों में भी बारिश का पानी भर गया। इसके अलावा सीतापुर आंख अस्पताल व सहकारी गन्ना समिति जाने वाली सड़क से लेकर दोनों ओर बने तमाम मकानों में भी पानी भर गया। जबकि झंझरी सब स्टेशन के समीप बनी पावर कॉरपोरेशन की कॉलोनी भी पानी से जलमग्न हो गई।
मूसलधार बारिश से जहां जिला अस्पताल के जनरेटर रूम में पानी घुस जाने पर अस्पताल प्रशासन को पूरे अस्पताल की बिजली काट देनी पड़ी तो वहीं जिला अस्पताल से जुड़े होने के कारण महिला अस्पताल की भी बिजली 16 घंटे से ज्यादा समय तक के लिए बाधित रही। जिससे मरीजों को दिक्कतों से जूझना पड़ा।
जबकि बारिश से ही दोनों अस्पतालों का ड्रेनेज सिस्टम भी ओवरफ्लो कर गया। जिसे ठीक करने के लिए अस्पताल प्रशासन को बाहर से सफाईकर्मी बुलाने पड़े। जबकि सीएमओ के अधीन जिलेभर में संचालित स्वास्थ्य केंद्रों में भी पानी भर जाने से यहां मरीजों को दिक्कतें उठानी पड़ी। वहीं जिला अस्पताल के आरडीसी सेंटर के भीतर तक पानी घुस आया।
बारिश से जहां ग्रामीण क्षेत्र के कई बिजलीघरों की आपूर्ति बेपटरी हो गई तो वहीं 220 केवी बिजलीघर से आवास विकास को आने वाली 33 केवी लाइन का तार भी तिवारी बाजार के पास टूट गया। जिससे पूरी रात आवास विकास के लोगों को अंधेरे में गुजारनी पड़ी। 12 घंटे बाद पावर कॉरपोरेशन कर्मचारियों ने जैसे-तैसे फॉल्ट को खोजकर उसे ठीक किया। जबकि मूसलाधार बारिश से ही सिविल लाइन, बड़गांव और झंझरी क्षेत्र के भी कई फीडर तीन-तीन घंटे के लिए बंद रहे।
बारिश से ग्रामीण क्षेत्र के डेढ़ दर्जन बिजलीघरों की बिजली भी करीब 12 घंटे गुल रही। तेज बारिश होने पर रात 12 बजे 220 केवी कंट्रोल रूम से ग्रामीण क्षेत्र के सभी बिजलीघरों की बिजली काट दी गई। लेकिन शनिवार की सुबह 11 बजे जैसे ही बारिश का रुख कुछ नर्म हुआ और बारी-बारी से सभी बिजलीघर चालू किए गए तो एकदम से कंट्रोल रूम में लगा 40 एमवीए का पावर ट्रांसफार्मर चालू ही नहीं हुआ।
जिसे ठीक करके चालू करने में पावर ट्रांसमिशन डिवीजन के लोगों को तीन घंटे लग गए। लेकिन इसके बाद भी लाइन फॉल्ट के चलते ग्रामीण क्षेत्र के तमाम बिजलीघर बंद रहे, जिसकी बिजली शनिवार की शाम फॉल्ट ठीक करने के बाद चालू की गई।