भगवान घनश्याम के प्रेम, करुणा अहिंसा की शिक्षा वासुधैव कुटुंबकम के संदेश व भगवान स्वामीनारायण नाम के संकीर्तन के साथ छपिया के स्वामी नारायण मंदिर में चल रहे नौ दिवसीय छपिया महोत्सव का रविवार को समापन हो गया। इस मौके पर मंदिर के महंत ने छपिया धाम में आने वाले सभी संतों व हरिभक्तों का अभिनंदन कर महोत्सव को सफल बनाने के लिए उनके सहयोग की सराहना की। कथावाचक ने कहा कि लोग भगवान घनश्याम के बताए रास्ते पर चलें।
भगवान घनश्याम के जन्मोत्सव कार्यक्रम को मनाने के लिए उनकी जन्मस्थली छपिया में नौ दिवसीय छपिया महोत्सव का आयोजन किया गया था। भगवान के पूजन-अर्चन के साथ प्रत्येक दिन श्रद्धालुओं ने भगवान की अमृतमयी कथा का श्रवण कर उनके दिखाए गए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।
विवार को समापन के दिन सुबह से ही पवित्र नारायण सरोवर पर हरिभक्तों ने स्नान किया और भगवान के मंदिर और जन्मस्थली की पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने भगवान की जन्मस्थली की मिट़्टी को अपने घर ले जाने के लिए प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया।
भगवान के पूजन के बाद मंदिर में महाआरती का आयोजन किया गया। रविवार को कथावाचक स्वामी नित्य स्वरूपानंद जी महराज ने कथा में कहा कि भगवान घनश्याम की जन्मस्थली और यहां रहने वाले क्षेत्रवासी धन्य हैं। यहां के कण-कण में भगवान स्वामीनारायण का वास है। स्वामी जी ने कहा कि भगवान स्वामी नारायण के बताए रास्ते पर चलकर अपने जीवन को सफल बनाया जा सकता है।
उन्होंने स्वामी नारायण के नाम का संर्कीतन कराकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। इसके बाद मंदिर में भव्य अन्नकूट का आयोजन किया गया और भगवान की पवित्र पोथी को कथा स्थल से लाकर भगवान की जन्म स्थली में स्थापित किया गया। मंदिर के महंत स्वामी वासुदेवानंद जी महराज व स्वामी हरिस्वरूपानंद जी ने महोत्सव में सहयोग के लिए महोत्सव के मुख्य यजमान आशीष भाई मानसेता, स्वामी नित्य स्वरूपदास जी, पवित्रानंद स्वामी आदि को भगवान की प्र्रतिमा देकर उन्हें सम्मानित किया।