शासन-प्रशासन कुछ भी दावा करे, लेकिन पुलिस है कि वह अपना ढर्रा बदलने को तैयार नहीं है। तभी तो अधिकारी घटना की तुरंत रिपोर्ट दर्ज करने का फरमान जारी करते रहते हैं, लेकिन वह धरना प्रदर्शन के बाद भी अपनी रट लगाए रहती है। मनकापुर में तो हद ही हो गई। यहां हत्या के 48 घंटे बाद भी पुलिस ने रिपोर्ट नहीं दर्ज की, तो ग्रामीणों का धैर्य टूट गया। गुस्साए ग्रामीणों ने कोतवाली पहुंचकर घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया।
मनकापुर थाना क्षेत्र के जमुनहा गैलनग्रंट निवासी चंद्रिका मौर्य सब्जी बेचने गए थे, लेकिन वह लौटकर घर नहीं आए। उनकी लाश रास्ते में झाड़ी के बीच पाई गई। चंद्रिका के दोनों बेटों ने प्राथमिकी दर्ज कराने की गुहार लगाई, लेकिन पुलिस जांच के बाद ही प्राथमिकी दर्ज होने की बात कहती रही।
घटना के 48 घंटे बीत गए, लेकिन पुलिस ने प्राथमिकी नहीं दर्ज की। इससे परिवारीजनों व ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। नाराज दर्जनों ग्रामीण परिवारीजनों के साथ कोतवाली पहुंच गए और घेराव का आक्रोश जताया। चंद्रिका के पुत्र रवींद्र मौर्य ने आरोप लगाया कि 14 जून को उसके पिता चंद्रिका मौर्य की हत्या घर के पास कर दी गई, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट नहीं दर्ज की।
उधर चंद्रिका के दूसरे पुत्र सुभाष मौर्य ने मनकापुर कोतवाल को प्रार्थनापत्र देकर कहा है कि उसके पिता सब्जी बेचने गए थे, लेकिन वह लौटकर घर नहीं आए। उनकी लाश रास्ते में झाड़ी के बीच पाई गई। उसे आशंका है कि उसके पिता की हत्या करके लाश को फेंक दिया गया है। पुलिस ने इसके बावजूद हत्या की प्राथमिकी नहीं दर्ज की। इस मौके पर गुलाब मौर्य, रवींद्र मौर्य, रामप्रसाद मौर्य, सुरेश मौर्य, बृजभान, श्याम सुंदर, राम आश्रय, रघुनाथ आदि मौजूद रहे।