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दुराचारी को 10 वर्ष की सजा

Fri, 03 Jun 2016 11:53 PM IST
अमर उजाला/बलरामपुर
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जेल
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एफटीसी प्रथम ने दुराचार करने तथा आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का दोषी मानते हुए एक व्यक्ति को 10 वर्ष की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने आरोपी को 75 हजार रुपये का अर्थदंड भी अदा करने का आदेश दिया है। न्यायाधीश ने अपने आदेश  में आरोपी द्वारा जमा किए गए अर्थदंड में से 50 हजार रुपये मुआवजा वादी को देने का आदेश दिया है। न्यायाधीश ने साक्ष्यों के अभाव में नाबालिग को अगवा करने के दो आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।
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देहात कोतवाली क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने थाने पर प्रार्थना पत्र दिया था कि उसकी नाबालिग लड़की मंदिर में दर्शन करने गई थी। लड़की को 17 दिसंबर 2012 को हरैया सतघरवा निवासी अमित कुमार सिंह अपने साथी अब्दुल मतीन के सहयोग से बहला-फुसलाकर भगा ले गया।

पुलिस ने रिपोर्ट लिखकर विवेचना शुरू की। नाबालिग लड़की की लाश घाघरा घाट के पास नदी से बरामद की गई। पोस्टमार्टम के बाद दुराचार का मामला प्रकाश में आया। पुलिस ने नाबालिग लकड़ी को अगवा करने, दुराचार करने व आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का आरोपी मानते हुए अमित के विरुद्ध तथा लड़की को अगवा करने में सहयोग करने वाले अब्दुल मतीन व दीपा शुक्ला के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
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सरकारी अधिवक्ता रवींद्र यादव ने मुकदमे के परीक्षण के दौरान 9 गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम सुनील कुमार ने अमित कुमार सिंह को नाबालिग को अगवा करने, दुराचार करने व आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का आरोपी मानते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास व 75 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।

अर्थदंड अदा न करने पर आरोपी को चार वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। न्यायाधीश ने आरोपी द्वारा जमा किए गए अर्थदंड में से 50 हजार रुपये वादी मुकदमा को मुआवजा देने का आदेश भी दिया है।
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