करनैलगंज क्षेत्र में बाढ़ की आशंका से आसपास के लोगों के रोंगटे अभी से खड़े होने लगे हैं। बीते दो तीन दिनों में होने वाली बरसात से घाघरा व सरयू के कछार पर बसे लोग सहमे हुए हैं। एल्गिन-चरसड़ी बांध को बचाने के लिए किया जा रहा प्रयास नाकाफी है।
बनाए गए स्पर बीते वर्ष करीब आधे कट गए थे, जिन्हें मजबूत बनाने के लिए विभाग काफी धीमी गति से कार्य करवा रहा हैं। बांध कई जगह क्षतिग्रस्त है। ग्रामीणों की मानें तो विभाग द्वारा बनाई गई योजना बांध को बचाने के लिए काफी नहीं है।
एल्गिन चरसड़ी बांध के बन जाने से उस पार की जनता का जीना मुश्किल हो गया हैं। बांध के उस पार के लोगों के घर व जमीन को नदी निगल चुकी है। बाढ़ से सुरक्षित करने के लिए एल्गिन चरसड़ी बांध का निर्माण करवाया गया था, जो लोगों के लिए कभी फायदेमंद तो कभी बहुत नुकसान दायक साबित रहा है।
पूर्व में बांध के कटने से पूरे क्षेत्र में तबाही मच गई थी। इसे बचाने के लिए माझा रायपुर क्षेत्र के करीब डेढ़ किलोमीटर के बीच में सिंचाई विभाग ने छह स्परों का निर्माण करवाया था। इसमें से एक नंबर स्पर बीते वर्ष नदी में समा गया। यही नहीं नदी की जलधारा ने अन्य स्परों को भी निशाना बनाया।
नदी कटान करते हुए बांध के समीप पहुंच गई। बांध से कहीं 70 तो कहीं 80 मीटर की दूरी पर नदी बह रही है। इससे इस बार बांध के कटने का खतरा बढ़ गया है। बांध को बचाने के लिए विभाग ने एक योजना बनाई है। स्पर नंबर एक का निर्माण कट इन वन पर पुराने बांध व दो नंबर स्पर के बीच करवाना प्रारंभ कर दिया। शेष पुराने पांचों की मरम्मत करवा दी।
स्पर के दोनों साइड व नोज पर जीरो ट्यूब बिछाकर उसमें मशीन से गीली बालू भरवाई जा रही है। यह कार्य धीमी गति से चल रहा है। एक नंबर स्पर का पटाई कार्य पूरा नहीं हो पाया है और न ही बांध की मरम्मत ही हो सकी है।
क्षेत्र के समोखन कहते हैं कि करीब दो सप्ताह में नदी में पानी आने की संभावना है, लेकिन अधिकारी अभी स्पर व बांध का कार्य पूरा नहीं करवा सके हैं। स्पर मजबूत नहीं हुआ तो बांध को बचाना मुश्किल हो जाएगा। वहीं ननके का कहना है कि पिछले वर्ष गन्ना, पिपरमिंट व धान की हजारों बीघा फसल बाढ़ से नष्ट हो गई थी।
कहते हैं कि बांध को बचाने का पूरा प्रयास चल रहा है। एक नवीन स्पर भी बनाया जा रहा है, वहीं पुराने स्परों की मरम्मत करवाकर दोनों साइड में व नोज पर जीरो ट्यूब बिछवा कर बालू भरवाया जा रहा है और उसी के ऊपर बालू भरी बोरी लगवाई जा रही है। बाढ़ आने से पहले ही सारे स्पर पूरे हो जायेंगे। प्रभाकर सिंह, जेई