गोंडा। तेज धूप व भीषण गर्मी की वजह से कुत्ते आक्रामक हो गए हैं। ग्रामीण इलाकों में गलियों में घूमने वाले कुत्तों ने अगर काट लिया तो सीएचसी पर जब तक पांच लोग वैक्सीन लगवाने नहीं पहुंचेंगे तब तक वैक्सीन नहीं लगेगी। इसके चलते मरीजों को मेडिकल कॉलेज के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। गत 21 अप्रैल से 20 मई तक मेडिकल कॉलेज में 3028 लोगों ने एंटी रैबीज की वैक्सीन लगवाई है।
जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एआरवी की उपलब्धता तो है लेकिन जटिल नियमों के कारण मरीजों को मेडिकल कॉलेज की दौड़ लगानी पड़ रही है। एआरवी के एक वॉयल में पांच डोज होती हैं, जिस कारण सीएचसी पर पांच लोग इकट्ठा होने पर ही वैक्सीन लगाई जाती है। तरबगंज सीएचसी पर सोमवार व बृहस्पतिवार को एआरवी लगाई जाती है। इसके अलावा अन्य किसी दिन वैक्सीन लगवाने के लिए पांच से छह लोगों का इकट्ठा होना जरूरी है।
अधीक्षक नवनीत गौरव ने बताया कि वैक्सीन का वायल खुलने पर तीन घंटे बाद असर कम होने लगता है। इसलिए पांच की संख्या होन पर ही वैक्सीन लगती है। सीएचसी मुजेहना में भी सप्ताह में दो दिन एआरवी लगती है। सीएचसी छपिया में बुधवार व शनिवार को एआरवी लगाई जाती है। सीएचसी पसका व खरगूपुर में भी पांच लोगों के इकट्ठा होन पर एआरवी लगाई जाती है।
गर्मी के मौसम में कुत्ते ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं। इस वजह से वह सड़कों पर आने-जाने वालों को दौड़ाते हुए काटते हैं। भोजन की कमी और तापमान में उतार-चढ़ाव को इसकी वजह माना जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. एके त्रिपाठी ने बताया कि कुत्तों के दिमाग में थर्मो रेगुलेटरी सिस्टम नहीं होता है। यही कारण है कि कुत्ते गर्मी को शांत करने के लिए जीभ निकालकर हांफते हैं। इससे महज 10 से 15 प्रतिशत ही गर्मी निकल पाती है। गर्मी के चलते उनमें चिड़चिड़ापन आ जाता है। जरा भी आवाज सुनने पर आक्रामक होकर लोगों को काट लेते हैं।
एसीएमओ डॉ. आदित्य वर्मा ने बताया कि सभी सीएचसी अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि एक भी व्यक्ति आए तो उसे एआरवी अवश्य लगाएं। वैक्सीन खराब होने की चिंता को लेकर मरीजों को परेशान नहीं किया जा सकता। हर रोज एआरवी लगाने का समय निर्धारित करें।