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खाली कराये गये जिला अस्पताल के वार्ड

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गोंडा के जिला अस्पताल में खाली पड़ा पुरुष सर्जिकल वार्ड। - फोटो : GONDA
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गोंडा। कोरोना वायरस को लेकर रविवार को जनता कर्फ्यू के बाद सोमवार को भी बंद जैसा ही नजारा ही दिखा। मुख्य गेट पर ही अस्पताल आने वालों से जानकारी ली जा रही है। अस्पताल में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा रहा। जिले भर में काफी सतर्कता बरती जा रही है। जिले का स्वास्थ्य विभाग रविवार को शासन की रिपोर्ट के बाद सोमवार को काफी सतर्क दिखाई दिया। जिला अस्पताल के सभी वार्डों का खाली हो गये हैं। गंभीर मरीजों को छोड़कर सभी मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इसके साथ ही सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
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बता दें कि रविवार को मुंबई से मनकापुर क्षेत्र में पहुंचे एक मरीज में खांसी और बुखार जैसे लक्षण मिलने पर सीएचसी से उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया था। लेकिन यहां डाक्टरों की टीम ने जांच की तो उनमें कोरोना जैसे कोई लक्षण नहीं मिले। उसके बाद मरीज को घर चेतावनी देकर वापस कर दिया गया। सीएमओ डॉ मधु गैरोला ने बताया कि ऐसे जो भी मरीज बाहर के प्रदेशों से आये हैं, उन्हें आइसोलेसन का पालन करने की सलाह दी गई है। इसके साथ रोजाना मेडिकल टीम उनके घर जाकर उनका हालचाल ले रही है।
सोमवार को जिला अस्पताल में केवल इमरजेंसी के मरीजों को इंट्री दी जा रही थी। पर्चा काउंटर और सभी ओपीडी दो अप्रैल तक पूरी तरह से बंद कर दी गई हैं। किसी भी प्रकार की आपदा से निपटने के लिए जिला अस्पताल के सभी वार्डों को पूरी तरह से खाली करा लिया गया है। बताया जा रहा है कि शासन की ओर से जो अलर्ट मिले हैं उसे देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है। इसके साथ ही जिले में हर क्षेत्र से मिलने वाली सूचनाओं पर पूरे एक्शन के लिए कंट्रोल रूम को भी अलर्ट किया गया है।
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नई बिल्डिंग को क्वारनटाइन वार्ड बनाया गया
सीएमओ डॉ मधु गैरोला ने बताया कि गंभीरता को देखते हुए जिला अस्पताल लगभग खाली हो चुका है। अस्पताल की नई बिल्डिंग को पूरी तरह से क्वारनटाइन वार्ड बना दिया गया है। इसके साथ ही जरूरत पड़ी तो जिला अस्पताल के वार्डों को उपयोग में लिया जायेगा। सभी सीएचसी को भी इमरजेंसी में क्वारनटाइल वार्ड तैयार रखने के निदर्चेश दिये गये हैं।
फीवर क्लीनिक स्थापित की गई
हर तरह का सर्दी, जुकाम और खांसी कोरोना के लक्षण नहीं हैं। यदि किसी को खांसी के साथ ही बुखार की समस्या है तो वो जरूर जिला अस्पताल में आकर जरूर परीक्षण करायें। अगर बुखार और खांसी के साथ ही किसी को सांस लेने में तकलीफ हो रही है तो उसकी जांच कराई जायेगी। सामान्य सर्दी जुकाम और बुखार के लिए जिला अस्पताल में अलग से फीवर क्लीनिक बनाई गई है। सभी से अपील है कि अगर बहुत इमरजेंसी न हो तो लोग अस्पताल भी आने से परहेज करें। ओपीडी और आपरेशन रूक जाने से मरीजों खुद घर चले गये हैं। -डॉ. मधु गैरोला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
बाहर से आये लगभग 5 हजार लोग बने चुनौती
यात्रियों के आंकड़ों पर गौर करें तो हवा यात्रा, रेल मार्ग और सड़क मार्ग से लगभग 5 हजार से अधिक लोग जिले के विभिन्न इलाकों में आये हैं। प्रशासन ये मानकर चल रहा है कि सभी की चेकिंग नहीं हो पाई है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग की ओर हर सीएचसी पर टीम को लगाया गया है। सीएमओ ने माना कि बाहर से ये लोग अब बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इन पर पूरी नजर रखी जा रही है।
विदशों से आये आठ लोग निरीक्षण में
रूपईडीह सीएचसी क्षेत्र में लगभग आठ लोग खाड़ी देशों से आये हैं। इनकी निगरानी के लिए रूपईडीह सीएचसी से टीम लगार्ठ गई है। सोमवार को टीम पूरे संसाधनों से लैस होकर गांव में गई और सबका हालचाल लिया। ये लोग मस्कट, जेद्दाह, दुबई, सऊदी सहित अन्य देशों से हाल ही में गांव आये हैं। इन सभी यात्रियों की स्क्रीनिंग की गई और भारत सरकार की ओर से दिये गये निर्देश के पालन करने की सलाह दी गई है। इस टीम में डॉ प्रवीण श्रीवास्तव, डॉ काजी नसेरूल हक, अतुल मिश्रा, डॉ वंदना गौतम की संयुक्त सर्विलांस टीम के साथ ही सीएचसी के नोडल डॉ जेपी शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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