बालपुर (गोंडा)। टेढ़ी नदी अचानक उफना गई है। इससे कटरा बाजार क्षेत्र के सैकड़ों बीघे खेतों में पानी भर गया है। टेढ़ी नदी में अचानक आए उफान से दो सौ से अधिक किसानों की फसल पानी में डूब गई हैं। इससे किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया है। जीवन दायिनी टेढ़ी नदी के रौद्र रूप से नदी के किनारों पर रहने वाले किसानों के लिये अभिशाप बन गयी है। इस सर्द मौसम में नदी का पानी बढ़ने से नदी के किनारों पर स्थित खेत जलमग्न हो रहे हैं। जिससे गेहूं, तिलहन व गन्ना जैसी फसलें पानी में डूबने से बर्बाद हो रही है। किसानों का आरोप है कि गोंडा-बहराइच बॉर्डर के पास बने साइफन से नहर का पानी टेढ़ी नदी में छोड़ा जा रहा है। जिससे यह समस्या आई है।
विकास खंड कटरा बाजार के फूलपुर मेहरवानाबाद गांव के पास नदी का पानी उफनाकर बाहर खेतों में पहुंच गया है। बॉर्डर के पास बने साइफन से नहर का पानी करीब एक हफ्ते पहले टेढ़ी नदी में छोड़ दिया गया। जिससे करीब 20 किलोमीटर के इलाके में जिन किसानों के खेत नदी के किनारे थे जलमग्न होना शुरू हो गये। किसानों ने बताया कि वैसे तो हम धान व गेहूं की फसलें इन खेतों से पैदा कर लेते थे। नदी में पानी बढ़ने से हमारी सैकड़ों बीघे की फसलों की बर्बादी शुरू हो गई है। गेहूं व सरसों की फसलें डूब रही हैं।
एक दर्जन से अधिक गांवों में नदी कर रही तबाही
टेढ़ी नदी में आये पानी से विकास खंड कटरा बाजार के टेढीरायपुर, मेहरवानाबाद, फूलपुर, चहलवा, कोनिया, शिवगढ़, कोल्हौर, मोती सिंह मथुरा, दमोदरपुर, देवापसिया, जयरामजोत, डफाली टेपरा, नौसहरा, भुरभुसियन पुरवा, माधोपुर, कोडरी, उर्दीगोंडा, अहिरन टेपरा जैसे अन्य तमाम गांव प्रभावित हैं।
नाराज किसानों ने नदी का पानी रोके जाने की मांग की
यहां के किसानों ने बताया कि नहर जब से बनी है उसका सही ढंग से संचालन न होने से उनका नुकसान ही हो रहा है। चूंटीपुर के राधेश्याम, ननके, जोगी मिस्त्री, बचनू, दशरथ, रईस, गजाधर, श्यामलाल, रामदेव, वसंतलाल भुरभुसियनपुरवा व माधोपुर के धनलाल बाजपेयी, सरबस लाल बाजपेयी, प्रयागदत्त, राजकुमार, बजरंगबली मुशीं, जगदंबा अवस्थी, आदित्य प्रसाद, सुखराज अवस्थी, दुर्गा प्रसाद, यज्ञ नरायन जैसे तमाम किसानों का आरोप है कि नहर का पानी अति शीघ्र नदी में आने से रोका जाना चाहिए। नहर का पानी नदी में आने से बढ़े जलस्तर को लेकर करीब दो दर्जन किसानों ने नारेबाजी करते हुए नहर विभाग के प्रति अपना रोष व्यक्त किया। किसानों ने कहा कि इसे जल्द न रोका गया तो उनकी फसलें बर्बाद हो जाएंगी। भुरभुसियन पुरवा निवासी सांवली प्रसाद का कहना है कि जब नहर से सिंचाई के बदले नुकसान हो रहा है तो नहर से क्या फायदा। अरविंद बाजपेयी का कहना है कि अब तो फसलें चौपट ही हो गईं। कोई सुनवाई नहीं हो रही है। राधेश्याम निशाद का कहना है कि हमारी प्रभावित फसलों का आकलन करवा कर मुआवजा दिया जाए। गजाधर का कहना है कि नदी में नहर का पानी छोड़ने से पहले कोई सूचना नहीं दी गयी। उदयराज का कहना है कि किसी तरह से पाई-पाई जोड़कर तो बोआई करवाई थी। अब इसकी भरपाई कौन करेगा।
नदी के किनारे कुछ दिक्कत आई है, वहां के लोगों की ओर से जानकारी दी गई है। पता किया जा रहा है और व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
-सतीश कुमार, एक्सईन सरयू नहर परियोजना
नहर कटने से 25 बीघे फसल डूबी
बेलसर (गोंडा)। सरयू नहर खंड प्रथम का मछराहिया मुजेड़ माईनर शिवलाल पुरवा के पास कट गया। इससे किसानों का करीब 25 बीघा फसल जलमग्न हो गई। किसान कृष्ण कुमार पासवान ने बताया कि रात में 12 बजे तक नहर में पानी नहीं था। बुधवार की सुबह जा कर जब खेत देखा तो पूरा खेत पानी में डूब चुका था। बताया कि केवल दो बीघा गेहूं की बोआई की थी वह पूरी फसल खत्म हो गई। किसान पवन यादव ने बताया कि उनकी गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है। लाल बहादुर, कन्हैया लाल, उदयराज, भगोती, राम बहादुर, राम संजीवन, राम अवतार, राम मिलन की फसल जलमग्न हो गई है। नहर के माइनर की लंबाई पांच किमी. है। इसकी सफाई के लिए 1.21 लाख रुपये खर्च भी हुुए, लेकिन सही ढंग से कार्य नहीं हुआ। सिंचाई विभाग के एसडीओ भारत भूषण भारती ने बताया कि चूहों ने नहर में बिल बना लिए थे, जिससे नहर कट गई। नहर की मरम्मत कराई जा रही है।