नंदिनी नगर इन दिनों केवल कथास्थल नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के मिलन का केंद्र बन गया है। राष्ट्रकथा शुरू होने से पहले शंख-घंटों की गूंज, साधु-संतों की उपस्थिति और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की भीड़ एक सामूहिक चेतना के निर्माण का संकेत देती है।
ऋतेश्वर जी महाराज की कथा सुनने के लिए संत-महंतों के साथ किसान, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। मंच के इतर यदि नजर दौड़ाई जाए तो आयोजन की व्यवस्था में जुटा एक अलग संसार दिखाई देता है। कोई जल व्यवस्था संभाल रहा है तो कोई पार्किंग, महिलाएं भंडारे की तैयारी में जुटी हैं और युवा स्वयं सेवक आगंतुकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
कैसरगंज संसदीय क्षेत्र के साथ-साथ गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती से भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी वफादार कार्यकर्ताओं को सौंपी गई है। विभिन्न जिलों से बसों के जरिए श्रद्धालुओं को कथास्थल तक लाया जा रहा है। कई स्कूलों की बसों से छात्र-छात्राएं भी कथा में पहुंचे।
नंदिनी नगर, डीएवी इंटर कॉलेज, सरयू डिग्री कॉलेज और रघुकुल महाविद्यालय के 100 से अधिक एनसीसी कैडेट्स व्यवस्था संचालन में लगे हैं। कैडेट्स को टुकड़ियों में बांटकर प्रवेश, अनुशासन और भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी दी गई है।
जनसहयोग से बन रहा आयोजन
पूर्व सांसद के आह्वान पर लोग अपने सामर्थ्य के अनुसार अनाज, सब्जी, फल और सामग्री का सहयोग कर रहे हैं। बच्चों द्वारा गुल्लक भेंट करना और ग्रामीणों का घर से उपज लाकर देना आयोजन को भावनात्मक मजबूती दे रहा है।
रोजगार का भी बन रहा माध्यम
कथा स्थल के आसपास अस्थायी दुकानों से लोगों को रोजगार मिला है। कोई कॉटन कैंडी बेच रहा है तो कोई चश्मा, खिलौने या खाद्य सामग्री। कई विक्रेताओं की दैनिक आय हजारों रुपये तक पहुंच रही है।
धर्म-संप्रदाय से ऊपर उठता मंच
राष्ट्रकथा में धर्म और संप्रदाय की दीवारें टूटती दिख रही हैं। विभिन्न समुदायों के लोग एक साथ आयोजन में भागीदारी कर रहे हैं। आयोजन ने सामाजिक समरसता और सहभागिता की एक नई मिसाल पेश की है।