करनैलगंज में जमीन काटते हुए बांध की तरफ बढ़ रही सरयू नदी। - संवाद
करनैलगंज (गोंडा)। सरयू नदी का जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है। रविवार शाम से सोमवार शाम तक करीब दो सौ बीघे खेत की जमीन काटकर नदी में समा गई।
सरयू का जलस्तर यदि खतरे के निशान से ऊपर होगा तो गांवों के लिए खतरा बढ़ जाएगा, मगर अभी जलस्तर खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर नीचे है। बीते 24 घंटों में जलस्तर करीब 25 सेंटीमीटर नीचे हुआ है। हालांकि सोमवार को घट रहे जलस्तर ने माध्यम गति से कटान शुरू किया।
दो दिनों में नदी ने ग्राम मांझा रायपुर, बहुवन मदार मांझा, चंदापुर किटौली के सामने नदी और बांध के बीच खाली पड़ी करीब दो सौ बीघे की जमीन कटकर नदी में समाहित हो गई। सहायक अभियंता पंकज आर्य का कहना है कि जलस्तर घट रहा है। मामूली कटान होने से बांध को किसी तरह का नुकसान नहीं है। बांध सुरक्षित है।
गन्ने व हरे चारे के खेत कटान की जद में
विश्नोहरपुर (गोंडा)। सरयू नदी का जलस्तर सोमवार से फिर बढ़ने लगा जिससे साकीपुर चहलावा गांव के गन्ना और चारे के खेत अब कटान की जद में आ चुके हैं। आधा दर्जन से ज्यादा परिवार इस आपदा से सीधे तौर पर प्रभावित हैं। उन्हें अब घर से पलायन करने का डर सताने लगा है। इसके बावजूद अब तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा जिससे लोगों में नाराजगी है। साकीपुर, दत्तनगर के लोग इन परिस्थितियों से गुजरते हैं। चहलावा में पिछले साल कटान से पीड़ित लोगों को अबतक मुआवजा नहीं मिला। (संवाद)