गंदगी, कूड़ा व नालों के पानी से कराहती टेढ़ी नदी की धारा को ही अवरुद्ध करने का कुत्सित प्रयास शुरू हो गया है। दबंग भू माफिया नदी के कछार में अवैध कब्जा करने के लिए नदी को कूड़े से पाटकर इसकी धारा को आगे करने कोशिश कर रहे हैं।
यह पूरा वाकया गोंडा-लखनऊ मार्ग पर बालपुर कस्बे के निकट हो रहा है जहां से प्रतिदिन अधिकारियों की आवाजाही होती है। पांच जून को पर्यावरण दिवस है और जल व वायू प्रदूषण देखना है तो बालपुर इसका जीता जागता उदाहरण है।
पर्यावरण को जल, वायू प्रदूषण से बचाने के लिए जहां पौधों को लगाने की मुहिम चलाई जा रही है और प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन गोंडा में न पेड़ों की कटान रुक रही है और न नदियों या प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने की पहल हो रही है।
इसके उलट जिले की नदियों पर अवैध कब्जा करने की कोशिश हो रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण जिले की टेढ़ी, बिसुही नदियां हैं। बहराइच के चित्तौड़ा झील से निकलने वाली टेढ़ी नदी जिले के आठ ब्लॉक क्षेत्रों से होकर गुजरती है। गोंडा-लखनऊ मार्ग पर बालपुर कस्बे के निकट टेढ़ी नदी की जमीन पर ही कब्जे शुरू हो गए हैं।
नदी में पानी कम होने की वजह से जहां धारा हुआ करती थी वहां पर दबंग लोगों ने निर्माण शुरू कर दिया है। साथ ही नदी को कूड़े से पाटकर उसकी धारा को आगे करने की कोशिश हो रही है।। इसके अलावा नये पुल व पुराने पुल के बीच गैपिंग में दोनों तरफ से कूड़ा डालकर धारा को रोकने की कोशिश हो रही है। इसी पुल से रोज जिले आला अधिकारी गुजरते हैं लेकिन अब किसी ने इस तरफ ध्यान देने की कोशिश नहीं की।