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बेतरतीब खड़े वाहनों से बाधित होता यातायात

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गोंडा नगर के एक कांपलेक्स के सामने सड़क पर खड़े वाहन। - फोटो : GONDA
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गोंडा। बेतरतीब ढंग से शहर के विभिन्न मार्गों पर वाहनों के खड़े होने से यातायात व्यवस्था ध्वस्त है। इसमें सुधार के सारे प्रयास बेकार साबित हो रहे हैं। शहर की सड़कों पर जगह-जगह जाम रहता है। टैक्सी व टेंपो के संचालक के लिए नगर पालिका परिषद 34 साल में स्टैंड बनाने को जमीन की व्यवस्था नहीं कर पायी। पालिका चालकों से कर की वसूली भी करती है। मगर सुविधा के नाम पर यात्रियों और वाहन चालकों के लिए स्टैंड तक नहीं है। नियमों की बातें करने वाले अधिकारियों के सामने ही सड़क को यहां तक की सरकारी दफ्तरों के सामने ही वाहनों का स्टैंड बना दिया गया।
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नगर पालिका परिषद का गठन ब्रिटिश सरकार के समय वर्ष 1869 में किया गया था। उस समय पालिका के प्रशासक जिलाधिकारी कर्नल ब्यालू हुआ करते थे। वर्ष 1900 में यहां अधिशासी अधिकारी की तैनाती होने लगी। वर्ष 1985 से पालिका परिषद ने टैक्सी स्टैंड का ठेका शुरू कर दिया। इसी दौरान टेंपो का भी यहां ठेका होने लगा। मगर 34 साल बाद भी नगर पालिका टैक्सी स्टैंड के लिए जमीन की व्यवस्था नहीं कर पाई। जिससे अभी भी टैक्सियों को खड़ा करने के लिए अस्थाई स्टैँड ही है। मौजूदा समय में पालिका परिषद ने टैक्सी और टेंपो के लिए एक करोड़ रुपये से अधिक का ठेका किया है। पालिका टैक्सी चालकों से कर की वसूली भी करती है। मगर सुविधा के नाम पर यात्रियों के बैठने, पीने के पानी व अन्य सुविधाओं के साथ ही स्टैंड तक नहीं है।
यहां बने हैं अस्थाई टैक्सी स्टैंड
- लखनऊ मार्ग के वाहनों के लिए पुराने चुनाव कार्यालय के पास
-तरबगंज रोड के वाहनों के लिए झंझरी ब्लॉक मुख्यालय के पास
-अयोध्या रोड के वाहनों के लिए बाईपास तिराहा के पास
-उतरौला रोड के वाहनों के लिए परसादी तालाब के पास
-बलरामपुर रोड के वाहनों के लिए ओवरब्रिज के पास
बिना पार्किंग की व्यवस्था के ही बन गए शॉपिंग माल
शहर में आधा दर्जन से अधिक मॉल बिना पार्किंग प्लान के ही खोल दिए गए। ऐसे ही 100 से अधिक मार्केटिंग काम्पलेक्स बना दिए गए हैं। जिनके पास पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। जबकि मॉल या मार्केटिंग कांप्लेक्स बनाने से पहले पार्किंग बनाने का नियम है। मगर किसी भी मॉल और मार्केटिंग कांप्लेक्स के मालिकों ने पार्किंग नहीं बनाई। यहां खरीदारी के लिए आने वाले लोग अपने वाहनों को सड़क तक खड़ा कर देते हैँ। दो पहिया वाहन से ही जाम शुरू हो जाता है। यहीं नही चौपहिया वाहन तो सड़कों पर ही खड़े रहते हैं। वाहनों की संख्या बढ़ने से पूरी सड़क से जाम लगता है। महिला अस्पताल तिराहे के पास तो यातायात पुलिस सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक वन-वे ट्रैफिक कर देती है। बाकायदा इसके लिए फौव्वारा चौराहे पर दो-दो सिपाहियों के साथ एक दरोगा की ड्यूटी लगाई जाती है। इसके बावजूद यहां हर रोज जाम लगता है।
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शहर में वाहनों के प्रवेश पर रोक की व्यवस्था हुई खत्म
शहर की सड़कों पर बेतरतीब खड़े वाहनों व टैक्सियों के प्रवेश पर रोक के लिए पहले व्यवस्था बनी थी। जगह-जगह लगने वाले जाम से निपटने के लिए तत्कालीन डीएम रोशन जैकब ने तत्कालीन एसपी राजेश पांडेय के साथ मिलकर यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए वाहनों के रुट के साथ ही उनके लिए अस्थाई टैक्सी स्टैंड चिन्हित कर दिया था। यहां से वाहनों का संचालन भी शुरू हो गया था। मगर अधिकारियों के तबादले के बाद टैक्सियों को प्रवेश शहर में दोबारा होने लगा। व्यवस्था अब ध्वस्त हो गई है।
शहर में यातायात व्यवस्था बनाए जाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। हर चौराहे पर पुलिस की ड्यूटी है और लगातार निरीक्षण करके व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जाता है। -वंदना त्रिवेदी, नगर मजिस्ट्रेट
गोंडा जनपद ही नहीं पूरे प्रदेश के किसी भी जनपद में पालिका का टैक्सी स्टैंड नहीं है। इसलिए वाहनों को खड़ी करने की समस्या है। गोंडा में अस्थाई टैक्सी स्टैंड सभी मार्गों के लिए पहले से चिन्हित है। वहां पर वाहन चालकों को टैक्सी खड़ी करने के निर्देश हैं। जहां अस्थाई स्टैंड चिन्हित हैं, वाहन खड़े किए जा रहे हैं। वह पालिका क्षेत्र में ही आता है। टैक्सी नहीं ई-रिक्शा ने यातायात समस्या बढ़ा दी है। -उज्मा राशिद, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद गोंडा
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