राखी की खरीदारी करतीं युवतियां
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भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक रक्षा बंधन त्यौहार पर गुरुवार को मनाया जाएगा। कल गुरुवार को बहनें भाइयों के कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर रक्षा का संकल्प लेंगी। वहीं भाई बहन को रक्षा सूत्र की लाज निभाने का वायदा करते हुए उपहार देंगे। इसे बुधवार को दिन भर बाजारों में चहल पहल रही। बहनों ने भाइयों के लिए सुंदर व महंगी राखियां खरीदीं।
भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक रक्षा बंधन का त्यौहार गुरुवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसे लेकर करीब पखवारे भर से तैयारियां चल रही हैं। बाजार में राखियों व मिठाइयो की तरह-तरह की दुकानें सजी हुई हैं। बुधवार को दिन बहनें भाइयों के लिए कपड़े, मिठाइयां व राखियां खरीदती दिखीं।
उधर भाई भी बहनों को उपहार देने के लिए तैयारियों में जुटे रहे। पंडित तापेश्वरी प्रसाद मिश्र ने बताया कि राखी सुबह छह बजे से दोपहर 12 बजे तक ही बंधवाना ज्यादा शुभ होगा। इसके बाद पचखा का योग है जिसमें कम से कम पांच रक्षा बंधन बांधा चाहिए।
इस त्यौहार को लेकर अलग-अलग किवदंतियां हैं जो आस्था को मजबूत करती हैं। कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर बलि राजा के अभिमान को इसी दिन चकानाचूर किया था। इसलिए यह त्योहार 'बलेव' नाम से भी प्रसिद्ध है।
महाभारत में पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने भगवान कृष्ण की कलाई से बहते खून को रोकने के लिए अपनी साड़ी का किनारा फाड़ कर बांधा जिससे उनका खून बहना बंद हो गया। तभी से कृष्ण ने द्रोपदी को अपनी बहन स्वीकार कर लिया था। वर्षों बाद जब पांडव द्रोपदी को जुए में हार गए थे और भरी सभा में उनका चीरहरण हो रहा था तब कृष्ण ने द्रोपदी की लाज बचाई थी।
एक जनश्रुति के अनुसार चित्तौड़ की राजमाता कर्मवती ने मुग़ल बादशाह हुमायूँ को राखी भेजकर अपना भाई बनाया था और वह भी संकट के समय बहन कर्मवती की रक्षा के लिए चित्तौड़ आ पहुंचा था। समय- समय पर भाई- बहनों के पवित्र रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन कर्तव्यों का याद दिलाता रहा है।