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अदम गोंडवी की जयंती आज

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गोंडा। इलेक्शन पर मुसलमानों से हम रुमाल बदलेंगे, अभी बदला है चेहरा, देखिये अब चाल बदलेंगे, मिले कुर्सी तो दलबदलू कहो क्या फर्क पड़ता है, ये कोई वल्दियत है, पार्टी हर साल बदलेंगे। रिश्वत को हक समझ के जहां ले रहे हों लोग, है और कोई मुल्क तो उसका मिसाल दो। परसपुर ब्लॉक के एक छोटे से गांव में जन्मे हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध जनकवि, शायर व गजलकार रामनाथ सिंह अदम गोंडवी ने अपना सारा जीवन गरीबों, मजलूमों के नाम समर्पित कर दिया। वे आज हमारे बीच तो नहीं हैं, लेकिन उनकी लिखी उक्त पंक्तियां आज भी लोगों के हृदय में सीधे उतरकर उन्हें झकझोर देती हैं।
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अदम गोंडवी की रचनाएं हमेशा लोगों को प्रेरणा देती रहेंगी। अदम ने अपनी बेबाक रचनाओं से राजनेताओं व अफसरों पर भी बहुत ही निडरता से कटाक्ष करते हुए लिखा है। सदन में घूस देकर बच गई कुर्सी तो देखोगे, ये अगली योजना में घूसखोरी आम कर देंगे। मुल्क जाए भाड़ में इससे उन्हें मतलब नहीं, एक ही ख्वाहिश है कि कुनबे में मुख्तारी रहे। महज तनख्वाह से निबटेंगे क्या नखरे लुगाई के, हजारों रास्ते हैं सिन्हा साहब की कमाई के। मिसेज सिन्हा के हाथों में जो बेमौसम खनकते हैं, पिछली बाढ़ के तोहफे हैं ये कंगन कलाई के। अपनी जीवंत गजल व शायरी से आम जनमानस व समाज के दबे, कुचले लोगों के दर्द को समाज के पटल पर अपनी लेखनी से बयां करने वाले अजीम शायर अदम गोंडवी ने जनपद को अपने साहित्य के माध्यम से जो पहचान दिलाई है, लोग आज भी उनके कायल हैं।
प्रसिद्ध जनवादी कवि व शायर रामनाथ सिंह अदम गोंडवी परसपुर ब्लॉक के आंटा, गजराजपुरवा गांव में जन्मे थे। उन्होंने खुद अपनी कविताओं में अपना परिचय व अपने गांव की बदहाली के बारे में लिखा है। खुदी सुकरात की हो या की हो रूदाद गांधी की, सदाकत जिंदगी के मोर्चे पर हार जाती है, फटे कपड़ों से तन ढांके गुजरता हो जहां कोई, समझ लेना वो पगडंडी अदम के गांव जाती है। उन्होंने अपनी रचना के माध्यम से अपने गांव की जो बदहाली लिखी है। उसकी सूरत तकरीबन आज भी वैसी ही है। अदम को उनकी लेखनी के लिए दुष्यंत कुमार अलंकरण से 1998 में नवाजा गया। इसके अलावा तमाम पुरस्कार व सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।
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अदम के पैतृक गांव आंटा गजराज पुरवा में उनकी याद में बने प्राथमिक विद्यालय में उनकी समाधि स्थल पर गुरुवार को 73वीं जयंती मनायी जाएगी। जिसमें उनके परिवार व गांव के लोगों सहित शायर, कवि, विद्यालय का स्टाफ, बच्चे व तमाम गणमान्य उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे।
अदम गोंडवी के निधन के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी रामबहादुर ने उनके गांव की काया पलटने के लिये जनसरोकार के तमाम प्रस्ताव बनाये थे। जिसमें कुछ धरातल के हकीकत पर उतर कर दिखलाई भी पड़े, लेकिन आज भी तमाम काम अभी भी जमीन पर होने बाकी हैं। जिस पर आज तक शायद प्रशासन ने कोई ध्यान देना मुनासिब ही नहीं समझा है।
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