गोंडा मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को लगी मरीजों की भीड़। -संवाद
प्रतिदिन औसतन 80 मरीजों को करानी पड़ रही निजी लैब से जांच
सूजन व संक्रमण के लिए कराई जाने वाली सीआरपी जांच भी बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
गोंडा। मेडिकल कॉलेज में भले ही एक रुपये के पर्चे पर मुफ्त इलाज का दावा किया जा रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे इतर है। यहां आने वाले मरीजों को अधिकांश जांच व दवाएं बाहर से ही लेनी पड़ रही हैं। पिछले 16 महीने से सीटी स्कैन मशीन खराब ही पड़ी है, अब थायराइड जांच की मशीन भी खराब हो गई। पिछले आठ दिनों से मरीजों को बाहर से थायराइड जांच करानी पड़ रही है। मशीन की मरम्मत में करीब ढ़ाई लाख रुपये का खर्च लगने के कारण अब इसे बनने में भी महीनों का इंतजार करना पड़ सकता है।
मौसम के बदलाव के कारण बुखार, सर्दी-खांसी, गले में दर्द, भूख न लगना, शुष्क त्वचा व बाल तथा थकान के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इन मरीजों में थायराइड ग्रंथि में समस्या को जानने के लिए चिकित्सक थायराइड टी-3 व टी-4 की जांच कराते हैं। हर रोज ऐसे 70 से 80 मरीजों को जांच लिखी जाती है। लेकिन यहां मशीन की खराबी के कारण उन्हें बाहर से जांच करानी पड़ती है। जिसके लिए मरीजों को 700 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। वहीं आंत में सूजन व संक्रमण के लिए कराई जाने वाली सीआरपी जांच भी एक महीने से नहीं हो रही है। इसके लिए भी मरीजों को बाहर के लैब का सहारा लेना पड़ता है।
शुक्रवार को अस्पताल आए देवतादीन को बाहर से थायराइड जांच करानी पड़ी। इसी प्रकार अपने बेटे का इलाज कराने आई पंड़रीकृपाल के तिवारीपुरवा निवासी जुबैदा को भी बाहर से थायराइड जांच करवानी पड़ी। मेडिकल कॉलेज के चिकित्साधीक्षक डॉ. एम. डब्ल्यू खान ने बताया कि थायराइड मशीन की मरम्मत में इस बार लंबा खर्चा आएगा। इंजीनियर ने करीब ढ़ाई लाख रुपये का स्टीमेट बनाया है। बजट मिलने के बाद मशीन की मरम्मत हो सकेगी। सीआरपी जांच जल्द शुरू हो जाएगी।