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शौचालय प्रोत्साहन राशि भुगतान मे फर्जीवाड़े में तीन पर मुकदमा

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मुजेहना (गोंडा)। मुजेहना की ग्राम पंचायत नौव्वागांव में शौचालय निर्माण के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के भुगतान में बड़ा फर्जीवाड़ा बीते दिनों उजागर हुआ था। यहां के पंचायत सचिव व ग्राम प्रधान ने लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि देने के बजाय एक फर्म के नाम पर दो चेक काटकर 2.24 लाख रुपये का भुगतान कर दिया था। इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद लीपापोती किए जाने के लिए कई दांव हुए लेकिन बुधवार को जिलाधिकारी के कड़े तेवर के बाद मुकदमा पंजीकृत हो गया।
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स्वच्छ भारत अभियान के सफल बनाने के लिए गांवों में प्रत्येक परिवार को शौचालय बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके तहत शौचालय का निर्माण कराने वाले लाभार्थी को सरकार की तरफ से 12 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाता है। मुजेहना के ग्राम पंचायत नौव्वागांव के ग्राम प्रधान सलाहुद्दीन व पंचायत सचिव सुनील सोनकर ने मिलीभगत कर इस योजना के तहत फर्जीवाड़ा करते हुए एक निजी फर्म के नाम से 2.24 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। इसकी शिकायत दरियापुर गांव के रहने वाले सीताराम तिवारी ने शिकायत डीएम समेत अन्य अफसरों से की।
शौचालय के बजट में फर्जीवाड़े की खबर अमर उजाला में प्रकाशित हुई। मामले को जिलाधिकारी ने संज्ञान में लेकर जांच के आदेश दिए। बुधवार को मामले की एफआईआर प्रभारी सहायक विकास अधिकारी मुजेहना ( एडीओ पंचायत) दिलीप कुमार उपाध्याय ने ग्राम पंचायत नव्वागांव के प्रधान सलाहुद्दीन, सचिव सुनील सोनकरव व फर्म के केडी त्रिपाठी जनरल ऑर्डर सप्लायर के विरुद्व मुकदमा दर्ज कराया है।
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आरोप है कि केडी त्रिपाठी जनरल ऑर्डर सप्लायर के नाम चेक संख्या 22653 व 22654 के माध्यम से 112000 के दो चेक दिनांक 22 दिसंबर 2019 को जारी करके 2.24 लाख रुपये अनाधिकृत रूप से आहरित कर लिए हैं। इसकी पुष्टि खाता संख्या-6 के स्टेटमेंट से भी की गई है। इस संबंध में थानाध्यक्ष धानेपुर संतोष तिवारी ने बताया कि एडीओ पंचायत दिलीप कुमार उपाध्याय के लिखित प्रार्थना पत्र के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गई है।
वहीं शिकायतकर्त्ता सीताराम के मुताबिक पिछले वर्ष दिसंबर महीने मे ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव ने एक निजी फर्म को दो चेकों के माध्यम से 2.24 लाख रुपये का भुगतान किया है। भुगतान की पुष्टि के लिए बैंक का स्टेटमेंट भी दिया गया है। आरोप है कि शौचालय का निर्माण कराने वाले लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि देने के बजाय ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव ने निजी फर्म के नाम से भुगतान लेकर सरकारी धनराशि को हड़प लिया।
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