एल्गिन-चरसड़ी बांध कटने के 4 दिन बाद घाघरा नदी का पानी अब तीन और गांवों में फैलना शुरू हो गया है। ऊंची जगहों को अगर छोड़ दें तो इन तीन गांवों में पड़ने वाले खेत, खलिहान और खंती इत्यादि पानी से डूब चुके हैं।
जबकि तहसील क्षेत्र करनैलगंज के 10 गांव बाढ़ से पहले ही प्रभावित चल रहे थे। नदी के चढ़ते-उतरते जलस्तर से यहां रहने वाले लोगों की मुश्किलेें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। वहीं एनडीआरएफ व प्रशासन के लोग बाढ़ राहत के काम में लगे हुए हैं।
गुरुवार तक जहां घाघरा नदी से करनैलगंज इलाके में आई बाढ़ से क्षेत्र के 10 गांव प्रभावित चल रहे थे तो वहीं इन गांवों में बाढ़ के पानी का लेबल बराबर हो जाने के बाद अब नदी का पानी धीरे-धीरे निचले इलाकों पर बसे तीन और गांवों में भरना शुरू हो गया है।
हालांकि नदी के जलस्तर में कोई खास बढ़ोत्तरी न होने से पानी की रफ्तार ज्यादा तेज नहीं है। लेकिन फिर भी जिन तीन गांवों में पानी भरने की शुरुआत हुई है वहां के खेत-खलिहानों से लेकर खंती इत्यादि जलमग्न हो चुकी हैं। जिससे लोगों की फसलें तो प्रभावित हुई हीं हैं, साथ में उनके सामने रोजमर्रा की दिक्कतें भी पैदा हो गई हैं।
बाढ़ का पानी अब तक करनैलगंज इलाके के नकहरा, काशीपुर, प्रतापपुर, घरकुईयां, पूरे अजब, पूरे अंगद, अतरसुईयां, काशीपुर, दिउली, नैपुरा और भटपुरवा के करीब 90 मजरों तक अपनी दस्तक दे चुका है। जिसमें से 50 की संख्या में ऐसे मजरे हैं जो बाढ़ के पानी से ज्यादा प्रभावित हैं।
प्रशासन के साथ एनडीआरएफ की टीमें लगातार पाल्हापुर चौकी पर बनने वाले लंच पैकटों का वितरण यहां बाढ़ पीड़ितों को कर रहे हैं। लेकिन अभी भी इलाके में तमाम ऐसे लोग हैं, जिनका आरोप है कि उन्हें बाढ़ चौकी पर बनने वाला लंच पैकेट नहीं मिल रहा। लोगों को आशंका है कि अगर नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होती है तो इससे और गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे।
जबकि जो गांव पहले से प्रभावित हैं वहां का जलस्तर बढ़ जाने से मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। अपर जिलाधिकारी त्रिलोकी सिंह ने बताया कि करनैलगंज में आई बाढ़ की आपदा से निपटने के लिए बचाव व राहत के काम में उनकी पूरी टीम लगी हुई है। लोगों को समय से भोजन के साथ ही खाद्यान्न सामग्री का वितरण कर दिया गया है।