गोंडा। बेसिक शिक्षा के अधिकारी हमेशा भ्रष्टाचार के आरोपों से दागदार होते रहे हैं। प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद से ही जिले में कार्रवाई का सिलसिला शुरू हुआ जो अभी भी जारी है।
मई 2017 में शासन ने जिले में तैनात रहे बीएसए अजय कुमार सिंह को भी भ्रष्टाचार के आरोपों से निलंबित किया गया था। इसके बाद दो और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और तीन खंड शिक्षा अधिकारी निलंबित किए जा चुके हैं। वहीं दो बीएसए शिकायतों के बाद हटाए जा चुके हैं।
हाल ही में शिक्षकों से धन उगाही के मामले में खंड शिक्षा अधिकारी ममता सिंह के निलंबन के बाद बीएसए डॉ. इंद्रजीत प्रजापति भी निलंबित कर दिए गए। वहीं तीन और कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में हैं।
महानिदेशक स्कूली शिक्षा को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके पहले मई 2017 से ही कार्रवाई की शुरूआत हो गई थी। तत्कालीन बीएसए अजय सिंह के बाद जिले में संतोष देव पांडेय की तैनाती हुई। एक स्कूल भवन गिरने के बाद उन्हें हटाया गया, फिर रमाकांत वर्मा बीएसए बने लेकिन ज्यादा दिन नही टिक पाए।
उनके हटने के बाद मनीराम सिंह बीएसए बने। फरवरी 2020 में शासन ने सहायता प्राप्त स्कूलों की जांच में सहयोग न करने के आरोप में तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनिराम सिंह को भी निलंबित किया गया। 18 फरवरी 2020 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. इंद्रजीत प्रजापति ने कार्यभार संभाला।
एक साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद ट्रांसफर शिक्षकों से वसूली के मामले में कार्रवाई में फंस गए। बीईओ ममता सिंह के निलंबन के बाद बीएसए डॉ. इंद्रजीत प्रजापति को भी 24 फरवरी को शासन ने निलंबित कर दिया।
इसके अलावा छुट्टी के नाम पर धन उगाही के आरोप में खंड शिक्षा अधिकारी जैनेंद्र गुप्त को और तबादले के बाद भी कार्य मुक्ति न करने के आरोप में खंड शिक्षा अधिकारी ओम प्रकाश पाल भी निलंबित किए जा चुके हैं। इस तरह कार्रवाई अभी और भी होनी है।
जिले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के पद नियुक्ति के बाद विवादों से सभी का रहा है। चार सालों में पांच बीएसए जिले में तैनात रह चुके हैं। पांचों को कार्रवाई से ही हटाया गया है, दो निदेशालय से संबद्ध किए जा चुके हैं। तीन बीएसए निलंबित किए जा चुके हैं।
इस तरह हर साल हो रही कार्रवाईयों से बीएसए संवर्ग के अधिकारी सहमे हुए हैं। शासन स्तर पर कार्रवाईयों से अधिकारियों में खासी चर्चा है और वह जिले में तैनाती से भी कतरा रहे हैं। माना जा रहा है कि अभी भी जिले में स्थिति सामान्य नही हुई है और अधिकारी इसकी जानकारी कर रहे हैं।
बेसिक शिक्षा में भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए तत्कालीन बीएसए डॉ. इंद्रजीत प्रजापति ने दिसंबर में पत्र जारी किया था। उन्होंने आशंका जताई थी कि कुछ गड़बड़ी हो सकता है।
इसके बाद 19 फरवरी को दोबार भी पत्र जारी कर खंड शिक्षा अधिकारियों को आगाह किया। आशंका के बाद हिदायत तो दिया लेकिन भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में बीएसए फेल हो गए, इसके पीछे क्या कारण रहा।